महाशिवरात्रि : महाकाल ने पहना सवा क्विंटल फूलों से बना सेहरा

उज्जैन। महाशिवरात्रि पर्व के दुसरे दिन महाकाल बाबा ने दुल्हे का स्वरूप धारण किया। उन्हें सवा क्विंटल फूलों के सेहरे के साथ माणक, मोती, चांदी का चन्द्र, सोने का छत्र भी चढ़ाया गया। सुबह 11 बजे तक दर्शन के बाद सेहरे के बरकती फूल पाने को श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही।

रातभर गाए मंगल गीत, सुबह सवा क्विंटल फूलों से सजा बाबा का सेहरा
ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर मंदिर शिवरात्रि पूजन अंतर्गत बाबा महाकाल ने भक्तों को सेहरा श्रृंगार में दर्शन दिये। दूल्हा बने बाबा महाकाल के मनोहारी दर्शन पाकर दर्शनार्थी भक्त धन्य हो गये। करीब पांच क्विंटल फूलों से सेहरा सजाने के साथ साथ पूरा गर्भगृह फूलों से सजाया गया था।

पूरी रात बाबा महाकाल के आंगन में भक्ति के रंग दिखाई दिये। जहां पंडे पुजारियों ने विभिन्न सुगंधित दृव्यों, फलों के रस से बाबा का स्नान कराया इसके पश्चात उन्हें दो दर्जन विभिन्न प्रकार के सुगंधित सवा क्विंटल फूलों का सेहरा सजाया गया। माणक, मोती, रजत चंद्र धारण करने के साथ ही सोने का छत्र और चांदी के सिक्के बाबा को समर्पित किये गये। सुबह 4 बजे से 11 बजे तक दूल्हा बने बाबा महाकाल के आलौकिक दर्शन पाकर भक्त धन्य होते रहे। बाद में सेहरे के बरकती फूल पाने के लिये श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। सेहरा श्रृंगार के फूल भक्त वर्ष भर अपने घरों में, व्यापारिक संस्थानों में पूजन के लिये रखते हैं।

दोपहर की भस्मार्ती, दो घंटे पहले ही रोक दिये दर्शन
महाकालेश्वर मंदिर में शिवरात्रि के दूसरे दिन विशिष्ट भस्मार्ती होती है। अलसुबह बाबा महाकाल सेहरा सजाते हैं वहीं दोपहर में भस्म रमाते हैं। वर्ष में एकमात्र अवसर होता है जब सुबह 3 बजे होने वाली भस्मार्ती दोपहर 12 बजे होती है। किंतु इस भस्मार्ती व्यवस्था के लिये मंदिर प्रशासन ने सुबह 10 बजे से ही मंदिर में दर्शनार्थियों का प्रवेश रोक मंदिर खाली कराना आरंभ कर दिया था।

अलाउंस किया जा रहा था कि सामान्य दर्शनार्थियों को दोपहर दो बजे बाद मंदिर में प्रवेश दिया जायेगा। हजारों श्रद्धालु यहां कतार में लगकर दर्शनों का इंतजार करते रहे। इधर विशिष्ट भस्मार्ती दर्शन के लिये प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और नेताओं के परिजन प्रवेश पास लेकर वीआईपी व्यवस्था के तहत मंदिर पहुंचे। एसडीएम क्षितिज शर्मा स्वयं वीआईपी व्यवस्था देख रहे थे।

रातभर ढोलक की थाप और मंजीरे गूंजे
इधर महिला श्रद्धालुओं और पूजारी परिवार की महिलाओं ने दूल्हा बने बाबा महाकाल के लिये मंगल गीत गाये। ढोलक की थाप और मंजीरों की गूंज से पूरा परिसर वैवाहिक उल्लास में डूबा नजर आया। भक्त भी इन मंगल गीतों पर झूमते नाचते नजर आये।

मंत्री की लताड़ के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
शिवरात्रि के दूसरे दिन भी महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा। श्रद्धालुओं को दो से ढाई किलोमीटर पैदल चलकर दर्शन के लिये मंदिर आना पड़ रहा था।

जहां वृद्धों के लिये ई रिक्शा की व्यवस्था के दावे किये गये थे वह बेमानी साबित हुए, जबकि अधिकारी वीआईपी प्रवेश मार्ग तक अपने-अपने वाहन लेकर आते रहे जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। जबकि आम श्रद्धालुओं और वृद्धों के वाहन दो किलोमीटर पहले ही रोके जा रहे थे। शिवरात्रि पर स्वयं ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने दर्शन व्यवस्था के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि बेवजह के बेरिकेट हटाये जायें किंतु प्रशासन ने व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं किया।

फेल हुआ क्राउड मैनेजमेंट
एक बार फिर महाकाल मंदिर प्रशासन शिवरात्रि पर सहज, सरल और सुलभ दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने में नाकाम हुआ, जबकि कहा जा रहा था कि क्राउड मैनेजमेंट के मान से व्यवस्था की जा रही है। भीड़ कम होने के बावजूद प्रशासन ने सरल दर्शन के लिये कोई कदम नहीं उठाये। स्थानीय श्रद्धालुओं की तो प्रतिक्रिया यह थी कि प्रशासन की इस मनमानी के कारण हम मंदिर दर्शन को जाने की बजाये अन्य मंदिरों में शिवपूजा कर लेते हैं। बाहरी श्रद्धालुओं को कितनी मुश्किलें सहना पड़ती हैं यह अंदाजा लगाया जा सकता है।