महिलाओं की क्षमता बढ़ाने में सहायक है सहकारिता- शताब्दी पांडे

उज्जैन:सहकारिता महिलाओं को समाज से जोडऩे के योग्य बनाती है तथा नीति निर्धारण के लिए उन्हें प्रेरित करती है। सहकारिता ही महिलाओं की क्षमता बढ़ाने में सहायक है। सहकारिता ही वह माध्यम है जिससे महिलाएं अपनी योग्यता महसूत करती हैं। जब महिलाएं सहकारिता में एकजुट होकर भागीदारी करती हैं तो स्वयं की आर्थिक उन्नति करते हुए समाज को भी आर्थिक रूप से समृद्ध करती हैं।
यह बात राष्ट्रीय महिला प्रमुख, सहकार भारती, रायपुर की निदेशक शताब्दी पांडे ने भारतीय ज्ञानपीठ में आयोजित डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ स्मृति सप्तदश अभा सद्भावना व्याख्यानमाला के पहले दिन गुरुवार को ‘सहकारिता के माध्यम से मातृशक्ति जागरण विषय पर संबोधित करते हुए कही। अध्यक्षीय उद््बोधन में संभागीय सतर्कता समिति लोकायुक्त के अध्यक्ष शशिमोहन श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र का विकास तभी संभव होगा जब समाज में सदभाव का वातावरण होगा।

इतिहास गवाह है कि स्वतंत्रता की लड़ाई बिना सामाजिक भे-भाव के लड़ी गई है। समारोह में व्याख्यानमाला के संयोजक प्रेमनारायण नागर विशेष रूप से उपस्थित थे। आरंभ में संस्था की छात्राओं ने सर्वधर्म प्रार्थना प्रस्तुत की। अतिथि स्वागत नवीन भाई आचार्य, खुशाल सिंह वाधवा, डॉ. राकेश ढंड, डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, महेश ज्ञानी, कवि आनंद, संस्था निदेशक अमृता कुलश्रेष्ठ, विद्यालयीन निदेशक डॉ. तनुजा कदरे, महाविद्यालयीन प्राचार्य डॉ. नीलम महाडिक, शिक्षा महाविद्यालयीन प्राचार्य डॉ. रश्मि शर्मा, विद्यालयीन प्राचार्य मीना नागर ने किया। स्वागत भाषण संस्था अध्यक्ष कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ ने दिया। इस अवसर पर वक्ताओं का शाल और श्रीफल से सम्मान किया गया। संचालन डॉ. गिरीश पंड्या ने किया। आभार हरिहर शर्मा ने माना।