मां शीतला के आशीर्वाद से संपन्न होता है विवाह

मन की उद्धिग्नता को शांत करती हैं मां 

रंगबिरंगे कांच से सजा है गर्भगृह 

हर साल मां बगलामुखी के लिए निकालते हैं चूनर यात्रा

अभय जैन ,सुसनेर/यूं तो क्षेत्र में आस्था के कई केंद्र हैं लेकिन सुसनेर के मेला ग्राउंड में स्थित शीतला माता का मंदिर इनमें से अपने आप में अनूठा है। सच्चे मन से की गई श्रद्धालुओं की हर मनोकामना मां शीतला के दरबार में उनके दर्शन मात्र से पूरी हो जाती है। यहां मां श्रद्धाुलओं के मन की उद्धिग्नता शांत करती हैं और शीतलता का आभास कराती हैं।

कंठाल नदी किनारे स्थित मां शीतला का यह मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। नगर में एकमात्र मंदिर होने से विवाह के समय इसी मंदिर में दूल्हा-दुल्हन द्वारा माता का पूजन किया जाता है। मातारानी के आशीर्वाद से ही विवाह समारोह निर्विघ्न संपन्न होते हैं।

आकर्षक है गर्भगृह की सजावट
शीतला माता मंदिर में रंगबिरंगे कांच से की गई गर्भगृह की आकर्षक सजावट लोगों का मन मोह लेती है। यहां मां शीतला की मनमोहक प्रतिमा के दर्शन करने और मनोकामना के लिए के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कांच की कलाकृतियों से गर्भगृह सुसज्जित है।

मां के आशीर्वाद से पूरा होता है विवाह
नगरीय क्षेत्र में हिंदू परंपरा के अनुसार होना वाला कोई भी विवाह समारोह मां शीतला के आशीर्वाद के बिना पूरा नहीं होता है। विवाह से पूर्व दूल्हा-दुल्हन का माता पूजन इसी मंदिर में किया जाता है। उसके बाद ही विवाह की अन्य रस्मों की शुरुआत होती है।

इनके भी होते हैं दर्शन
इस मंदिर के गर्भगृह में ही शीतला माता के साथ गुणानी माता, मोतीसर महाराज और चामुंडा माता भी विराजमान हैं। साथ ही मंदिर परिसर में दूधाखेड़ी वाली माताजी की प्रतिमा, भेरू महाराज व तनोडिय़ा वाली माताजी के भी दर्शन भक्तों को होते हैं।

प्रतिवर्ष निकलते हैं चूनर यात्रा
प्रतिवर्ष मंदिर के पुजारी पं. जगदीशानंद जोशी के सान्निध्य में नवरात्रि की पंचमी पर मां शीतला के दरबार से 25 किलोमीटर लंबी चूनर यात्रा निकाली जाती है। यह पैदल यात्रा नलखेड़ा स्थित मां बंगलामुखी मंदिर पहुंचती है जहां मां को चूनर ओढ़ाई जाती है। इस वर्ष 3 अक्टूबर को 11वीं चूनर यात्रा निकाली जाएगी। नवरात्र के चलते कोई भक्त सुबह-शाम तो कोई दिनभर माता के दरबार में रहकर आदिशक्ति की आराधना कर रहा है। वहीं कुछ श्रद्धालु नंगे पैर रहकर तो कुछ श्रद्धालु व्रत व उपवास रखकर शक्ति की भक्ति में लीन हैं। मंदिर भक्ति की खुशबू से महक रहे हैं।