मुश्किल समय में भी अपने मूल्य न छोड़ें

एक बार एक सभा को संबोधित के लिए देश के एक महान विद्वान को बुलाया गया। विद्वान ने हाथ में 100 रुपए का नोट ऊपर उठाते हुए सभा की शुरुआत की। विद्वान की चर्चा आस पास के इलाके में इतनी ज्यादा थी कि उन्हें सुनने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए।

विद्वान ने अपना हाथ ऊपर करते हुए पूछा कि इस नोट को कौन पाना चाहेगा? इस पर वहां मौजूद सभी लोगों ने अपने हाथ उठा दिए। इस पर विद्वान ने कहा कि यह नोट किसी एक आदमी को मिलेगा इस नोट को मुझे पहले रगड़ लेने दो।

उन्होंने अब नोट को अपने हाथों से तोड़- मरोड़ डाला और हाथ से ऊपर उठाकर पूछा अब इस नोट को कौन लेगा? इसके बाद भी सभा में मौजूद सभी लोगों ने नोट को लेने के लिए हाथ उठा दिए।

इस पर विद्वान ने कहा कि अच्छा, तो मुझे ऐसा भी करने दो।’ और उन्होंने नोट को जमीन में गिराकर अपने जूतों से रगड़ दिया। नोट अब पूरी तरह से गंदा हो चुका था। विद्वान ने फिर हाथ में लिया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा? अब इस सब के बाद भी सभी लोगों ने नोट को पाने के लिए हाथ उठा दिए।
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अब विद्वान ने कहा, मेरे दोस्तों, मैं आपको महत्वपूर्ण बात बताना चाहता था। भले ही मैंने इस नोट के साथ अच्छा न किया हो लेकिन इससे आप लोगों को एक सबक जरूर मिला।

आप नोट को इसलिए लेना चाहते हैं कि रगड़ने से इसकी कीमत कम नहीं हुई। यह अभी भी 100 रुपए का नोट है। ऐसे ही कई बार जीवन भी हमें रगड़ देता है, हमें गंदा बना देता है। कई बार ऐसा समय लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है। लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जाहे जितनी भी बुरी परिस्थिति आ जाए पर हमें अपनी कीमत या मूल्य या गुण हमेशा बरकरार रखने चाहिए।’

आप इस बात को कभी न भूलो कि आप दुनिया में एक स्पेशल इंसान हो। इसांन देखने में कैसा भी हो लेकिन दुनिया उसी को अपना संबंध रखना चाहती जिसके पास कोई गुण हों। यानी जो जितना मूल्यवान होता है उसकी उतनी हर जगह जरूरत होती है। – यही इस कहानी का सार है।