मूवी रिव्यू: एक्शन भरपूर है फिल्म ‘जंगली’

पहली बार कोई हॉलीवुड डायरेक्टर बॉलीवुड के लिए फिल्म बना रहा है, ऐसे में उत्सुकता तो बहुत थी. लोग भी अनुभव करना चाहते थे कि चक रसेल किस तरीके से अपनी काबिलियत को भारतीय दर्शकों के बीच परोसेंगे.

वैसे बॉलीवुड और जानवरों का तो बहुत पुराना नाता रहा है. कई ऐसी फिल्मे आई हैं जो सिर्फ जानवरों के इर्द-गिर्द घूमी हैं. काफी सालों बाद बॉलीवुड में हाथियों को लेकर फिल्म जंगली बनाई गई है. तो क्या चक रसेल हॉलीवुड फिल्मों का लार्जर दैन लाइफ एक्सपीरियंस हमें करवा पाएंगे? आइए जानते हैं, कैसी फिल्म है जंगली, जिसका निर्देशन मशहूर अमेरिकन डायरेक्टर चक रसेल ने किया है.

कहानी

हाथी के दांत की तस्करी एक ऐसा धंधा बन गया है जिस पर आज भी पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है. ये बिजनस मार्केट में काफी अच्छी तरह फल फूल रहा है. चक रसेल के निर्देशन में बनी जंगली भी इसी मुद्दे को उठाने का प्रयास करती दिखी है. दिपानकर नायर हाथियों से खासा प्यार करने वाला इंसान है. वो अपनी पत्नी के साथ मिलकर चंद्रिका एलिफेंट सेंचुरी खोलता है. वहां कई सारे हाथियों को पनाह दी जाती है. अब एक दिन दिपानकर की पत्नी की मौत कैंसर के चलते हो जाती है. इसके बाद दिपानकर का बेटा राज (विद्युत जामवाल) अपने पिता को छोड़कर मुंबई चला जाता है.

वो वहां एक जाना माना जानवरों का डॉक्टर बन जाता है. लेकिन जब राज अपनी मां की दसवीं बरसी पर अपने पिता से मिलने आता है, तब उसे एहसास होता है कि चंद्रिका एलिफेंट सेंचुरी में सब कुछ बदल चुका है. यहां अब शिकारियों का बोलबाला है. एक इंटरनेशनल पोचिंग रैकेट यहां स्थापित हो चुका है. रोज कई सारे हाथी इन शिकारियों के द्वारा मारे जाते हैं. अब राज अपने पिता के सपने को बिखरते हुए नहीं देख सकता. तो क्या राज इस सेंचुरी को बचा पाएगा, क्या इन मासूम हाथियों की जान बचेगी, क्या ये अवैध रैकेट रुकेगा और सबसे बड़ा सवाल क्या राज इन हाथियों का बदला ले पाएगा. इन तमाम चीजों को जानने के लिए आपको चक रसेल की फिल्म देखने जाना होगा.

चक रसेल ने जंगली के माध्यम एक गंभीर मुद्दा तो उठाया है, लेकिन फिल्म देखकर लगता है वो अपने उदेश्य में पूरी तरह सफल होते नजर नहीं आए हैं. जंगली में तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को तो उठाया गया, लेकिन इसके समाधान पर फिल्म प्रकाश नहीं डालती. थाईलैंड के जंगलों में शूट की गई इस फिल्म में कहानी कम और एक्शन सीन्स ज्यादा देखे जा सकते हैं. ये फिल्म हमें जंगल के खूबसूरत नजारे जरूर दिखाती है, लेकिन कमजोर कहानी के कारण वो रंग नहीं जमता है.

एक्टिंग

विद्युत जामवाल ने खुद को इस इंडस्ट्री में एक्शन हीरो के रूप में स्थापित कर लिया है. कमांडो और कमांडो 2 के बाद अब जंगली में भी वो खतरनाक स्टंट करते नजर आ रहे हैं. उन्होंने पूरी फिल्म में कई बार मार्शल आर्ट का प्रयोग किया. तो कह सकते हैं विद्युत ने अपने धमाकेदार एक्शन सीन्स से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. लेकिन जरा सोचिए, फिल्म का उदेश्य ये एक्शन सीन्स दिखाना था या तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को बल देना. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि विद्युत एक्शन सीन्स में जरूर जमे हैं लेकिन इंटेंस सीन्स में उनकी पकड़ कमजोर सी लगी है.

बड़े पर्दे पर अपना डेब्यू कर रही आशा भट्ट उतना प्रभावित नहीं करती हैं. बता दें, फिल्म में वो एक पत्रकार के रोल में हैं. लेकिन उनका किरदार पत्रकारिता कम और जबरदस्ती का प्रेम प्रसंग करता हुआ ज्यादा दिखता है. उम्मीद करते हैं इस मॉडल को भविष्य में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर रोल मिलेंगे.

अक्षय ओबेरॉय की बात करें, तो उनका काम भी औसत ही कहा जाएगा. एक फॉरेस्ट अधिकारी के किरदार में वो ज्यादा विश्वसनीय नहीं लगे. फिल्म में उनका रोल भी काफी छोटा है. अगर जंगली में किसी की एक्टिगं से दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आएगी, तो वो इन हाथियों की होगी. जी हां, इन बेजुबान जानवरों ने अपनी मासूमियत से दर्शकों का दिल कुछ हद तक जरूर बहलाया है.

निर्देशन

चक रसेल ने इससे पहले हॉलीवुड में मास्क और स्कॉर्पियन किंग जैसी कई सुपरहिट फिल्में डायरेक्ट की हैं. लेकिन अफसोस, जंगली के साथ वो ऐसा न्याय करते नजर नहीं आए. उनका सारा ध्यान सिर्फ एक्शन सीन्स पर ही केंद्रित रहा, जिसके चलते फिल्म की कहानी अपनी दिशा से भटकती रही. उन्होंने मुद्दा जरूर अच्छा चुना था लेकिन उसे मुकाम तक पहुंचाते हुए वो नहीं दिखे. फिल्म का क्लाइमेक्स बेहतरीन एक्शन सीन्स के वजह से दर्शकों को बांधने में कामयाब रहा. लेकिन उन चंद एक्शन सीन्स के लिए इतनी देर तक वेट करना थोड़ा मुश्किल सा हो जाता है.

वैसे जंगली की एक मजबूत कड़ी भी है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी लाजवाब है. जंगल के उन बेहतरीन दृश्यों को कैमरे के अंदर बखूबी कैद किया गया है. इसका श्रेय मार्क इरविन को जाता है.

म्यूजिक

जंगली का म्यूजिक ज्यादा दमदार नहीं है. बस मोहन कानन द्वारा गाया गया ‘ दोस्ती’ थोड़ा सुकून देता है. उस गाने में हाथी और इंसान के रिश्ते को बड़ी खूबसूरती से दर्शाया गया है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर उसकी गति के मुताबिक नहीं है. बैकग्राउंड स्कोर थोड़ा एनर्जेटिक हो सकता था.

तो कह सकते हैं, चक रसेल की जंगली एक बार के लिए बच्चों का दिल बहला सकती है. लेकिन अपनी कमजोर कहानी और असफल संदेश के चलते ये उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाएगी.