मेरे महाकाल उज्जैन बुला लो मुझे

मेरे महाकाल उज्जैन
बुला लो हमें
अपनी विद्या का
दान दे दो हमें।
भारत में रहकर भी
उज्जैन आया नहीं
अब तो दर्शन करा दो हमें
अपनी छाया में
हमको बुला लो प्रभु
अब तो उज्जैन बुला लो हमें
अपने चरणों का
दास बना लो हमें
अपनी भक्ति का
ज्ञान करा दो हमें
अपनी करूणा के
दर्शन करा दों हमें
हमें उज्जैन नगरी
बुलाओं हमें।
अमृत की बूंदे बहाओं यहां
त्रिनैत्रधारी तुम हो प्रभु
करूणा की वर्षा
कर दो यहां
उज्जैन नगरी बुला लो हमें
मेरे महाकाल
उज्जैन बुला लो हमें।

– सुखदेव व्यास, रिद्धि विहार, मालनवासा उज्जैन