मोदी का मौन और देश का बढ़ता आक्रोश, राहुल के लिए खुला मैदान

उन्नाव और कठुआ मामले को लेकर देश गुस्से में है. जनता सड़क पर उतरकर आरोपियों के खिलाफ सख्त सजा की मांग कर रही है. इसी मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हजारों लोगों के साथ गुरुवार को आधी रात को इंडिया गेट पर कैंडिल मार्च कर अपने आक्रोश का इजहार किया.बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन है. इस मामले में अभी तक सरकार की ओर से उचित कार्रवाई होती हुई नजर नहीं आ रही है, जिसे देखकर लगता है कि राहुल गांधी के लिए सियासी मैदान खाली है.

बता दें कि उन्नाव और कठुआ रेप मामलों ने 5 साल पहले दिल्ली में हुए निर्भया कांड की याद ताजा कर दी है. उस वक्त सत्ता में बैठी कांग्रेस मौन थी और विपक्ष के तेवर सख्त थे. बीजेपी नेता सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष कर रहे थे. निर्भया कांड को लेकर 2014 के लोकसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई गई थी. जो केंद्र की सत्ता से कांग्रेस को बेदखल करने की बड़ी वजह बनी.

पांच साल बाद वैसे ही हालात एक बार फिर बनते हुए नजर आ रहे हैं. उन्नाव और कठुआ रेप मामले को लेकर लोग गुस्से में हैं. गुनहगारों को बचाने की बेशर्म कोशिशें हो रही हैं. निर्भया कांड के दौरान आवाज उठाने वाली बीजेपी अब खामोशी अख्तियार किए हुए हैं तो विपक्ष में बैठकी कांग्रेस आक्रोशित है.

पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर पूरी बीजेपी मौन है. कांग्रेस की बदली हुई सियासत के साथ राहुल गांधी अपने युवा अंदाज में मोदी सरकार को घेरने की लगातार कवायद कर रहे हैं. हाल के वर्षों में राहुल लीक से हटकर अपनी सियासत से युवाओं को कनेक्ट करने की तेजी से कोशिश कर रहे हैं. मोदी सरकार के खिलाफ राहुल युवाओं, दलितों, किसानों और रोजगार के मुद्दों को उठाकर उनसे जुड़ने की कवायद में हैं.

यूपी के उन्नाव में रेप के आरोपी बीजेपी विधायक पर एक्शन में देरी और पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद कार्रवाई करने में देरी से जहां बीजेपी निशाने पर थी और जम्मू के कठुआ में 8 साल की मासूम बच्ची के रेप-मर्डर के वीभत्स मामले पर देश गुस्से में था तो आधी रात को राहुल गांधी ने कैंडल मार्च कर देश के गुस्से को अपनी आवाज दी और केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया. आखिरकार शुक्रवार सुबह सीबीआई ने कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार किया, लेकिन इससे पहले मोदी और योगी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया.

मौजूदा दौर की सियासत में किसानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तेवर सख्त हैं. मई 2011 में यूपी में बसपा की सरकार थी और ग्रेटर नोएडा के भट्टा पारसौल गांव में वे किसानों के प्रदर्शन का हिस्सा बने. इसके बाद से लगातार राहुल किसानों की आवाज उठाते आ रहे हैं. मोदी सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण बिल में संसोधन के खिलाफ राहुल सड़क पर उतरे और सरकार को झुकना पड़ा.

मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों के आंदोलन में शामिल हुए. देश के किसानों की हालत को समझने के लिए पूरे किसानों के बीच गए. किसानों के साथ गांव का पैदल दौरा किया. किसानों की कर्जमाफी को लेकर राहुल ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की. इसके अलावा जंतर मंतर पर बैठे किसानों के धरने में भी शामिल हुए.

एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ जब 2 अप्रैल को दलित युवाओं ने भारत बंद का आह्वान किया तो राहुल गांधी ने उनकी मांगों का समर्थन किया और कहा कि दलित युवा अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं उन्हें सलाम. इस मामले पर कड़े विरोध के बाद मोदी सरकार को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल करनी पड़ी और दलित समुदाय के सामने बार-बार सफाई देनी पड़ी कि उनकी ओर से न तो इस मामले में कोई बदलाव किए गए थे और ना ही सरकार आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की कोई कोशिश सरकार कर रही है. यहां सरकार ने अगर पहले ही कदम उठाए होते तो राहुल गांधी को मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने का मौका नहीं मिलता.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार युवाओं को राजगार देने के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर रहे हैं. देश के युवाओं को रोजगार के नाम पर धोखा देने का इल्जाम मोदी पर लगाकर लोगों से कनेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं.

राहुल ने देश ही नहीं विदेश से भी रोजगार को लेकर मोदी को कठघरे में खड़ा किया है. मौजूदा दौर में रोजगार एक बड़ी समस्या है. देश के कई राज्यों में यूथ नौकरी को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. राहुल उनके साथ भी उनके आंदोलनों में हिस्सा ले रहे हैं.सत्ता में आने से पहले नरेंद्र मोदी ने 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी केंद्र सरकार रोजगार के मुद्दे पर सवालों के घेरे में है.