योग शिविर में साधकों ने सीखी योग क्रियाएं

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रकल्प – ‘आरोग्य’ के अंतर्गत हर वर्ष की तरह इस बार भी तीसरा अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया, जिसके तहत देश भर की शाखाओं में ‘विलक्षण योग शिविरों ‘ का आयोजन किया गया।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के साथ जुड़े लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह एक गर्व का क्षण है, जिन्होंने गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य अनुग्रह से आत्म-ज्ञान (‘ब्रह्म-ज्ञान’) को प्राप्त कर अपने जीवन को सत्य के मार्ग पर बढ़ाया।

ध्यान के इन नियमित अभ्यासकों के लिए, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक बड़ा प्रतीक है तथा योग के अनुकरणीय विज्ञान और इसके मूल को धारण करने का जो कि प्राचीन हिंदू विद्यालयों के विचारों में निहित है। परम पूजनीय गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में, डीजेजेएस नियमित रूप से ‘विलक्षण योग शिविरों’ को मुफ्त में आयोजित करता रहा है, जिसमें स्वस्थ जीवन के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है और स्वदेशी जीवन शैली और योग के सही अभ्यास के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इन ‘विलक्षण योग शिविरों’ के पीछे का प्रमुख उद्देश्य न केवल योग को पुन: मानव जीवन में स्थापित करना है बल्कि आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देना भी है। इन शिविरों में शरीर की संपूर्ण चिकित्सा, मन और परिपूर्ण संतुलन और सद्भाव की प्राप्ति के लिये योगासन, प्राणायाम और ध्यान के महत्व और प्रतिष्ठा का वर्णन मिलता है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की दिल्ली स्थित अनेक शाखाओं में योग शिविरों का आयोजन किया गया|

शिविर में गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याओं ने योग प्राणायाम की महत्त्वता बताते हुए कहा कि योग संपूर्ण शारीरिक, मानसिक व अध्यात्मिक सेहत को सिद्ध करने की वैज्ञानिक तकनीक है| विलक्षण योग संपूर्ण मानसिक सेहत में लाभ व मन की शक्ति को जागृत करने का आसान साधक है|

उन्होंने बताया कि विलक्षण योग मोटापे का रामबाण उपचार है| हमारे विभिन्न शारीरिक तंत्र जैसे पाचन क्रिया तंत्र, स्नायु तंत्र, रक्त संचार तंत्र आदि में विकारों के कारण रोग पैदा होते हैं| विलक्षण योग इन तंत्रों में से विकारों को रोकने व सही करने में सभी अनेकों चिकित्सा क्रियाओं की तकनीक से अधिक लाभदायक है| उन्होंने बताया कि अगर वर्तमान समय में भौतिकवाद की भागदौड में भाग रहा मनुष्य हर दिन योग के लिए कुछ समय निकाले तो वह एक सेहतमंद जीवन व्यतीत कर सकता है| तन सेहतमंद है तो मनुष्य का मन भी सेहतमंद हो सकता है|