लघुकथा:प्रबल आशंका

देख, मेरी फोटो जमीन पर पड़े अखबार के टुकड़े की ओर इशारा कर नन्हे पौधे ने पास लगे पेड़ की टहनियों से कहा, मेरे रोपण कार्यक्रम की। पर इस फोटो में तो पेड़ की टहनियों ने झुकने की कोशिश करते हुए कहा, ढेर सारे स्त्री-पुरुष दिख रहे हैं, जमीन पर हाथ लगाते हुए, तू तो…… बड़ी मुश्किल से दिखाई पड़ रहा है? फोटो में तो मैं दिखाई पड़ भी जाऊँ नन्हे पौधे का स्वर अब एकाएक चिंतायुक्त हो गया, पर आशंका इस बात की है कि कुछ दिनों बाद मैं धरती पर ही दिखाई नहीं पडूंगा।

लघुकथा:मूर्तिभंजक खबर
अरे भाई साब, आपको पता चला? पड़ोसी हरपालसिंह हड़बड़ाए स्वर में बोले, रामकिशन मारा गया एक्सीडेंट में। रामकिशन? कौन रामकिशन? मैंने सतर्क स्वर में पूछा। अरे, रामकिशन को नहीं जानते? उन्होंने आँखें चौड़ी करते हुए कहा, रामकिशन, पिछले कई सालों से आपके यहाँ दूध देने वाला, आपका दूधवाला, रामकिशन! अरे! मेरे अंदर बैठी आत्मकेन्द्रित मूर्ति भरभराकर टूटी, ओऽह, व्हेरी सॉरी टू नो और मरे हुए से मेरे स्वर से उजागर हुआ, पछतावा और लज्जा।