लोकसभा चुनाव: कल दिल्ली में हो सकता है प्रत्याशी का फैसला

मालवीय के पिछडऩे की चर्चा डॉ. परमार की दावेदारी मजबूत

लोकसभा चुनाव में उज्जैन-आलोट संसदीय सीट के कांग्रेस के प्रत्याशी का फैसला शुक्रवार को दिल्ली में हो सकता है। यहां से अब तक सिर्फ पूर्व मंत्री बाबूलाल मालवीय को टिकट की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था लेकिन अचानक ही विधायक महेश परमार की बहन डॉ. सीमा परमार का नाम तेजी से सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि जिले के विधायकों की भी डॉ. परमार के नाम पर सहमति है।

सूत्रों के अनुसार सभी प्रकिया, जातिगत आधार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह से नजदीकी को देखते हुए तराना निवासी पूर्व मंत्री मालवीय की उम्मीदवारी तय माना जा रही थी। इसी बीच तराना विधायक परमार अपनी बहन डॉ. परमार के लिए मैदान में उतर आए।

विधायक परमार की मजबूत स्थिति और शिक्षित महिला की दावेदारी को देखते हुए प्रदेश की चुनाव अभियान समिति ने भी मालवीय के साथ डॉ. परमार का नाम भी केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय चुनाव समिति की १५ मार्च को दिल्ली में बैठक होना है।

उनके समक्ष अब सिर्फ दो नाम है ऐसे में मालवीय की जगह डॉ. परमार को मौका दिया जा सकता है। इधर सूत्रों के अनुसार जितेंद्र गोयल का नाम भी चर्चा में आया है। ऐसे में कांग्रेस से किसी अप्रत्याशित उम्मीदवार की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

इसलिए नीमच से करवाया तबादला

सर्वविदित है कि परमार खुद दावेदारी कर रहे थे लेकिन पार्टी द्वारा मौजूदा विधायकों को मौका नहीं दिए जाने के नियम के कारण उन्हें दौड़ से बाहर होना पड़ा।

यही वजह है उन्होंने बहन की दावेदारी करना तय किया। सूत्रों के अनुसार इसी रणनीति के चलते उन्होंने नीमच के कॉलेज में अतिथि प्रोफेसर के पद पर पदस्थ बहन का यहां तबादला करवाया जिससे बाहरी होने का आरोप लगाकर कोई उनका विरोध न कर सके।

विधायकों से समर्थन की जुगत

सूत्रों की मानें तो बहन के लिए विधायक परमार को नागदा, घट्टिया और बडऩगर के विधायकों ने समर्थन का पत्र दिया है जिसे मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंपा है।

हालांकि विधायक ने पत्र की बात को नकारा लेकिन परमार द्वारा उनसे सहयोग मांगने की बात स्वीकारी है। सूत्रों का यह भी दावा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ विधायक परमार पर विशेष स्नेह रखते हैं। ऐसे में विधायकों की सहमति भी मिलती है तो डॉ. परमार का टिकट पक्का है।

मंत्री पुत्र को सिंधिया की ‘नाÓ

सभी को पता है कि कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट के पुत्र नितेश उर्फ चिंटू भी यहां से दावेदारी कर रहे थे। पैनल में उनका नाम भी पहुंच गया था।

स्थिति मजबूत करने के लिए चिंटू की गत माह जोरदार लांचिग भी की गई थी लेकिन ऐन मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मना कर दिया जिसके बाद वह दौड़ से बाहर हो गए।

इनका कहना

विधायक परमार ने उनसे मिलकर मुख्यमंत्री से उनकी बहन की उम्मीदवारी के संबंध में बोलने का कहा था, सीएम के पूछने पर सहमति देंगे लेकिन पत्र नहीं दिया है। पार्टी जिसे भी टिकट देगी जिताने के लिए साथ देंगे।
– रामलाल मालवीय, विधायक, घट्टिया

विधायक परमार आज मिले थे लेकिन टिकट के संबंध में उन्होंने कोई चर्चा नहीं की। सीएम जिसे टिकट देंगे वही हमारा प्रत्याशी होगा।
– मुरली मोरवाल, विधायक, बडऩगर

पार्टी सर्वोपरि है। हाईकमान टिकट के संबंध में जो भी निर्णय लेंगे उसका पालन करेंगे।
– महेश परमार, विधायक, घट्टिया