लोकसभा चुनाव 2019: चुनाव आचार संहिता लागू, क्या हैं इसके मायने?

Lok Sabha Elections 2019: चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही देशभर में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। चुनाव आयोग के द्वारा की गई घोषणा के मुताबिक देशभर में कुल 7 चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जायेंगे। चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है जबकि मतगणना 23 मई को होगी।

रविवार को चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू कर दी गई है। यहां जानें क्या है आचार संहिता और इस दौरान किस तरह के प्रावधान लगाए जाते हैं। चुनाव आयोग की गाइडलाइन में कहा गया कि लोकसभा चुनाव 2019 में निष्पक्ष और निर्विवाद चुनाव संपन्न करवाना मुख्य मकसद है।बता दें कि चाहे लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव दोनों समय आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है। यहां जानें आचार संहिता से जुड़ी सभी बड़ी बातें-

क्या है आचार संहिता-
आचार संहिता कुछ नियमों की एक लिस्ट होती है। इस दौरान राजनेताओं को गाइडलाइन जारी किए जाते हैं कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है। इन नियमों का पालन चुनावी उम्मीदवारों को ना सिर्फ अपने भाषणों में करना होता है बल्कि सभी प्रकार के चुनावी प्रचार और यहां तक कि उनके घोषणापत्रों में भी करना होता है।

कब लागू किया जाता है-
चुनाव आयोग जब चुनाव की तारीखों की घोषणा कर देता है इसके बाद तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक आचार संहिता लागू हो जाती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निष्पक्ष और निर्विवाद चुनाव संपन्न कराना इसका मुख्य मकसद होता है औऱ इस दौरान सभी राजनेताओं और चुनावी उम्मीदवारों को इन सभी नियमों का पालन करना होता है। आचार संहिता लागू होने के बाद अगर कोई नेता या चुनावी उम्मीदवार मतदाताओं को रिश्वत देते हुए या किसी तरह की अनैतिक कार्य करते हुए पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकती है।

क्या हैं आचार संहिता के प्रमुख गाइडलाइन-

सामान्य आचार संहिता (general code) राजनीतिक पार्टियों को अपने प्रतिद्वंदी पार्टियों की उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर ही आलोचना करनी होगी। वोटरों को लुभाने के लिए जाति और सांप्रदायिक लाभ उठाने से बचना होगा। झूठी जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना नहीं करनी होगी। वोटरों को किसी तरह का रिश्वत नहीं देना होगा। प्रदर्शन और अनशन भी प्रतिबंधित होगा।

मीटिंग (meetings) पार्टियों को अगर कोई बैठक या सभा करनी होगी तो उन्हें उस इलाके के स्थानीय पुलिस को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी ताकि वे सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम कर सकें।

चुनाव प्रचार (processions) अगर दो या दो से अधिक पार्टियां एक ही रुट में चुनाव प्रचार के लिए निकली हैं तो आयोजनकर्ताओं को आपस में संपर्क कर ये तय करना होगा ताकि वे आपस में क्लैश ना हो जाएं। एक दूसरे के विरोध में हिंसा का प्रयोग बिल्कुल भी प्रतिबंधित होगा।

पोलिंग डे (polling day) सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को एक पहचान पत्र रखना होगा। इसमें किसी पार्टी का नाम नहीं होगा ना ही चुनाव चिन्ह और ना ही किसी चुनावी उम्मीदवार का नाम होगा।

पोलिंग बूथ (polling booths) केवल मतदाता जिनके पास चुनाव आयोग के द्वारा मान्य पास होगा वे ही पोलिंग बूथ के अंदर जा सकते हैं।

निरीक्षक (observers) चुनाव आयोग हर पोलिंग बूथ के बाहर एक निरीक्षक तैनात करेगा ताकि अगर आचार संहिता का कोई उल्लंघन कर रहा है तो उसकी शिकायत उनके पास की जा सके।

सत्ताधारी पार्टी (the party in power) इस दौरान सत्ताधारी पार्टी के मंत्रियों को किसी भी तरह की आधिकारिक दौरे की मनाही होगी, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपनी आधिकारिक दौरे पर चुनावी प्रचार ना करें। उन्हें किसी तरह के लोक लुभावने वादे नहीं करने होंगे। सार्वजनिक स्थानों पर किसी तरह का एकाधिकार नहीं होगा।

चुनावी घोषणापत्र (election manifestos) 2013 में जारी किए गए नए गाइडलाइन के मुताबिक इस नियम में ये कहा गया है कि चुनावी घोषणापत्र में बताए गए वादों को पूरा करना होगा।