वर्कशॉप :इम्पॉवरमेंट ऑफ कपल्स, हैप्पी फैमिली हैप्पी होम..

वर्तमान समय में परिवारों में सुख और चैन घटने लगा है। रिश्तों दूरिया बढ़ रही है… फिर चाहे वह पति-पत्नी हो या सास-बहू। इन दुरियों को मिटाने और परिवार में खुशियां बढ़ाने के लिए अक्षरविश्व और भारतीय जैन संगठन (बीजेएस) द्वारा एक वर्कशॉप आयोजन 6 व 7 अक्टूबर को किया जा रहा है।
वैसे तो सभी विश्वास रखते हैं कि जोड़े स्वर्ग में बनते और इस दुनिया में आकर मिलते हैं । फिर ऐसा क्यों होता है कि कुछ जोड़े तो विवाह के बाद अपना जीवन अपने परिवार के साथ प्रसन्नता से बिताते हैं और कुछ जोड़े आपस में व परिवार के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाते ? कभी पति और पत्नी के बीच तो कभी बहू और सास के बीच तनाव होता है।

क्यों हम जीवन को अपने देखे हुए सपनों की भाँति नहीं जी पाते ? क्यों हमारा समाज दुखी है घर से मिलने वाली खुशियों के अभाव में? कार्यक्रम की संयोजक डॉ. श्रुति जैन ने बताया कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर परिवारों में और परिवारों से अनिवार्य रूप से बात होनी चाहिए जिससे एक परिवार के सभी सदस्यों को बोध हो कि इस परिवार की खुशियों और आपसी सामंजस्य को बैठाए रखने में उनका योगदान किस प्रकार से होना चाहिए।

कार्यक्रम की मुख्य ट्रेनर डॉ. सोनल मेहता रहेगी। २२ वर्षो से निरंतर सामाजिक कार्यक्रमों से जुड़ी हुई है। डॉ. मेहता ने महिलाओं, युवा व बच्चों के उत्थान के लिए कई कार्यक्रम चलाए। सन 2011 से सोसायटी फॉर एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सेंसेक्स) एनजीओ की संस्थापक सचिव भी है।

इओसी प्रोग्राम का उद्देश्य

यह कार्यक्रम विशेषज्ञों द्वारा इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया है कि यह परिवार को समस्या की मुख्य वजह ढूंढने में और उसका निराकरण करने में मदद करती है तथा विवाहित जीवन में आपके सपनों से भी दोगुनी खुशी लाती है, इओसी निम्नलिखित इश्यूज को समझने में कपल की मदद करता है….

 पत्नी और परिवार के सदस्यों के लिए बदली हुई भूमिकाओं और माहौल को स्वीकार्यता में मदद।

 एक दूसरे से उम्मीदें कितनी हों।

 सुखी विवाहित जीवन के किये विवाह पूर्व के कौन से झूठ एडजस्ट करना होते हैं।

एक दूसरे को टाइम और स्पेस देना।

 विवाहित जीवन के लिए किस किस के द्वारा क्या समझौते किये जाना चाहिए।

ओपन कम्युनिकेशन का महत्व।

विवाहित जीवन में पेशेंस, ईगो और टॉलरेंस का महत्व।

 विवाहित जीवन में सेक्रिफाईसेस, आदि।

इओसी प्रोग्राम के बेनिफिट…

कपल को और अधिक क्लोज़ आने और आपसी कम्युनिकेशन बढ़ाने में मदद करता है। यह जोड़ों को यह समझने में मदद करता है कि हम सभी अलग इंसान हैं और हमें एक-दूसरे का सम्मान करने की आवश्यकता है।

यह कपल को सभी जिम्मेदारियों को साथ साथ निभाने के योग्य बनाता है।

यह पति को यह भी रिअलाइज़ करवाता है कि पत्नी को नए घर नए माहौल में कंफर्टेबल करने की उसकी जि़म्मेदारी है।

यह कोर्स सभी सदस्यों के बीच कम्युनिकेशन को बढ़ाता है।

यह भी जोर देता है कि नई बहू अब हमारे परिवार का हिस्सा है। एक परिवार वह होता है जिसके सदस्यों के मध्य संवाद हो जो एक दूसरे का सम्मान करें, केयर करें, और एक दूसरे को समझने के लिए समय दें, सभी के पास अपना टाइम और अपना स्पेस हो।

परिवार के मुख्य इश्यूज…
अंडरस्टैंडिंग का अभाव, बदली हुई भूमिका और बदले हुए वातावरण को स्वीकार नहीं कर पाना, हाई और अनरियलीस्टिक उम्मीदें, कॉम्प्रोमाइज़ के प्रति अनिच्छा, एडजस्टमेंट में कठिनाइयाँ, कमिटमेंट्स जो पूरे न हो सकते हों, विवाह बंधन के बाद बनने वाली नई जिम्मेदारियों से अनभिज्ञता और उन्हें मैनेज करने से अरुचि, परस्पर अनादर का भाव, लड़कियों के माता-पिता द्वारा सद्भावनावश ही सही, अनचाहे हस्तक्षेप, क्वालिटी टाइम की कमी जो जोड़ों को एक-दूसरे के साथ बिताना पड़ता है, मीनिंगफुल कम्युनिकेशन की कमी, तुलना (विवाह से पहले और बाद में)-विवाह के बाद और विवाह पूर्व की जिम्मेदारियों और स्वतंत्रता में।

इओसी प्रोग्राम
कार्र्यक्रम दो दिनों की कार्यशाला के रूप में आयोजित किया जाता है। सभी सत्रों में उपस्थिति जरूरी है। उपस्थिति के समय वाइफ और हसबेंड के लिए अलग-अलग दिन, 10 साल या उससे कम के लिए विवाहित जोड़े। सभी सत्र में कई एक्टिविटीज़ और पार्टिसिपेशन के माध्यम से संवाद होगा।

प्रमुख मार्गदर्शक- डॉ. सोनल मेहता

दिनांक- 6 व 7 अक्टूबर 2018

स्थान- आईटीआई, वाघेश्वरी मंदिर के सामने,उदयन मार्ग, उज्जैन