विनम्रता से मिलती है पात्रता, सफलता के लिए इसे अपनाएं

बचपन में स्कूल में हमें सिखाया जाता था कि पेड़ जितना बड़ा होता जाता है, उतना जमीन की ओर झुकता है। पर कुछ ही लोग ऐसे हैं, जिन्हें बचपन में सिखाई गई यह बात याद रहती है। आज स्पर्द्धा के जिन हालात में हम अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उसमें अक्सर हम चाहकर भी विनम्र नहीं हो पाते। लेकिन इन हालात के बावजूद हकीकत तो यही है कि जो झुकता है, वह सभी के दिलों को जीतता है।

विनम्रता के बारे में हम सभी की अलग-अलग मान्यताएं होती हैं। कोई इसे जरूरी समझता है और कोई गैर-जरूरी। कोई कहता है कि भ्रष्टाचार के इस युग में विनम्र होकर चलना असंभव है, तो कोई कहता है कि विनम्रता तो कायरता की निशानी है। पर कुछ लोगों को वह कायरता नहीं लगती, उनके लिए तो यह ऐसी ताकत है, जो व्यक्ति को शांति, सहनशीलता, शक्ति और ऊर्जा प्रदान करती है। ऐसे लोग मानते हैं कि जो विनम्रता से जीना सीख लेते हैं, उनकी अनेक परेशानियां देखते ही देखते समाप्त हो जाती हैं।

फिर यह भी जानना जरूरी है कि बिना विनम्रता को धारण किए, हम कोई भी दूसरा गुण धारण नहीं कर पाएंगे, क्योंकि विनम्र होकर ही हम पात्रता अर्जित कर सकते हैं। विनम्रता का गुण सहयोग व एकता का वातावरण बनाता है, जिससे हम बड़ी आसानी से अपनी आपसी दूरियों को मिटाकर सौहार्दपूर्ण व्यवहार कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में इसी विनम्रता को व्यक्त करने के लिए प्रणाम करने की परंपरा है और बड़ों का झुककर अशीर्वाद लेने की प्रथा भी है। यह गुण हमें अहंकार से बचाता है और भविष्य के धोखों के प्रति सतर्क करता है। विनम्रता से पेश आने वाला व्यक्ति कभी अति-महत्वाकांक्षी नहीं होता, क्योंकि उसे जीवन में कुछ खोने का डर नहीं रहता। उसके ऊपर दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने का जुनून सवार नहीं होता। उसे लोग सहज ही स्वीकार करते हैं।

इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति विनम्र व्यक्ति जीवन में जो कुछ भी पाना चाहता है उसे आसानी से प्राप्त कर लेता है।