विफलता अंत नहीं, नए मौके का आगाज है

असफलता कैसी भी हो हमें निराश करती है। पर, ऋषभ लवानिया ने इसे खुद पर हावी नहीं होने दिया और इसे एक मौके की तरह लिया। इसलिए आज वह एक सफल एंटरप्रिन्योर हैं, कई स्टार्टअप्स को सफलता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उनका स्टार्टअप ‘वीट्रेकर’ अफ्रीका में लोगों को व्यवसाय खड़ा करने में मदद कर रहा है।

कैसे हुए प्रेरित
ऋषभ लवानिया दिल्ली के एक सामान्य मध्यवर्गीय परिवार में पले-बढ़े। उन्होंने अपना पहला स्टार्टअप तब शुरू किया था, जब वह 12वीं में पढ़ रहे थे। वह मात्र सत्रह साल के थे। परिवार के लोग चाहते थे कि वह अपने पिता की तरह सिविल इंजीनियर बनें। पर, वह तो बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स जैसा बनना चाहते थे। उनका ध्यान पढ़ाई से ज्यादा अपने स्टार्टअप रेड कार्पेट इवेंट को खड़ा करने पर था। इस कारण वह बारहवीं की परीक्षा में असफल भी रहे। बारहवीं में असफलता से वह निराश तो थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। वह लोगों से सिर्फ इतना कहते कि एक साल के लिए वह छुट्टी पर जाएंगे। असल में उन्होंने अपना अगला एक साल अपने स्टार्टअप को सफल बनाने में लगाया। वह खूब घूमे, नए लोगों से मिले। नई भाषाएं और तकनीक सीखीं। इस दौरान उनके ऐसे दोस्त बने जो व्यवसाय जगत को करीब से जानते थे। वह कहते हैं, ‘नासकॉम, फिक्की में मेरे कई दोस्त थे, जिन्होंने मेरी सोच बदलने में मदद की।’

वह अपने स्टार्टअप से दिल्ली- एनसीआर सहित जयपुर में कई विज्ञापन और कॉरपोरेट ईवेंट आयोजित करने में सफल रहे। दूसरे मौके में 12वीं परीक्षा पास की, पर वह अंकों को सफलता मापने का सही पैमाना नहीं मानते थे।

वह अपने पहले स्टार्टअप से अपनी ग्रेजुएशन के पहले साल तक जुड़े रहे। फिर व्यवसाय में कुछ बेहतर करने के लिए कई उद्यमियों, निवेशकों से मिले। उन्होंने साल 2013 में रेस्त्रां लॉजिस्टिक फर्म ‘जस्ट गेट इट’ शुरू किया। पर, उन्हें इससे उतनी सफलता नहीं मिली, जितनी पहले स्टार्टअप से मिली थी। यह कंपनी कुछ महीनों तक ही टिक पाई।

यहां से उन्होंने जाना कि मार्केट की सही समझ और समय पर निवेश होना कितना जरूरी है। वह बाजार, उत्पाद और ग्राहकों के स्वभाव पर ज्यादा से ज्यादा रिसर्च करने लगे। वह अमेरिका गए, वहां साल 2015 में केसू दूबे से मिले और उनके साथ डाटाबेस टेक स्टार्टअप ‘जेलर 8′ शुरू किया। यह उनके करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

चीन के जेडड्रीम्स वेंचर्स ने उनके इस स्टार्टअप को अच्छी रकम में खरीद लिया। इससे उनके पास काफी पूंजी इकट्ठा हो गई। वह अपनी तरह जमीन से उठे लोगों की योजनाओं में निवेश करने लगे। फिर एक मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीट्रेकर’ शुरू किया, जो अफ्रीका में भारत सरकार और नीदरलैंड सरकार की मदद से लोगों को अपना व्यवसाय स्थापित करने में मदद कर रहा है।

काम की बात 
जीवन में नई चीजों की तलाश करें। नए लोगों से मिलें। अपनी रुचि के आयोजनों में भाग लें। योजनाओं के बारे में सिर्फ सोचें ही नहीं, उन्हें अमल में भी लाएं। तभी आप आगे बढ़ सकते हैं.

गुरु मंत्र
किसी विफलता के बाद खुद के साथ कुछ समय बिताएं। अपना आकलन करें। कोई नया स्किल सीखने और नए लोगों से मिलने में समय बिता सकते हैं।-