व्यक्ति की महानता का कारण उसका ज्ञान और व्यवहार होता है

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक संत जिनका नाम तुकाराम था वह रोज प्रवचन दिया करते थे। उन्हें सुनने दूर दूर से लोग आया करते थे। आसपास के क्षेत्रों में उनकी प्रसिद्धि काफी बढ़ गई थी, जिस वजह उनका एक पड़ोसी उनसे जलन की भावना रखता था। वह रोज प्रवचन सुनने के बाद संत तुकाराम को नीचा दिखाने का मौका ढूढ़ता रहता था।

एक दिन संत तुकाराम की भैंस ने उस पड़ोसी के खेत में जाकर उसकी बहुत सारी फसल खराब कर दी। यह सब देख कर उस पड़ोसी को बहुत गुस्सा आया और गुस्से में संत तुकाराम को बुरा-भला कहने लगा।

संत तुकाराम ने उनसे मांगी माफी और उनकी किसी बात का जवाब नहीं दिया। ऐसे में पड़ोसी को और अधिक गुस्सा आया और उसने एक डंडे से संत की पिटाई कर दी। संत तुकाराम ने तब भी उस पड़ोसी से कुछ नहीं बोला और अंत में पड़ोसी थककर अपने घर चला गया।

अगले दिन जब तुकाराम प्रवचन दे रहे थे, तब वह पड़ोसी नहीं आया। तुकाराम जी पड़ोसी के घर गए और माफी मांगने लगे। तुकाराम जी ने पड़ोसी को प्रवचन का निमंत्रण भी दिया।

तुकाराम जी की सहनशीलता और ऐसा स्वरूप देखकर वह पड़ोसी उनके पैरों में गिर पड़ा और क्षमा मांगने लगा। तब तुकाराम ने पड़ोसी को उठाया और गले लगा लिया। पड़ोसी को अब समझ आ गया कि संत तुकाराम जी की महानता का कारण उनका ज्ञान और व्यवहार है।