शब्द संभालकर बोलें, एक शब्द आरती तो दूसरा घाव बन जाता है

उज्जैन:पर्युषण पर्व दसलक्षण धर्म में बुधवार को शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर बोर्डिंग में मुनि श्री मार्दवसागर महाराज ने कहा मार्दव का अर्थ है मृदुता, कोमलता। सभी आत्माओं में छोटे-बड़े की कल्पना से मुक्त होकर समानता का भाव, व्यवहार, व्यवहार से उत्तम मार्दव धर्म है। श्री महावीर तपोभूमि में प्रभा दीदी के सान्निध्य में 10 लक्षण धर्म की पूजा के साथ नित नियम की पूजा, अभिषेक, शांतिधारा, ध्यान तत्व चर्चा, भगवान की आरती, सामायिक पाठ किया।

प्रभा दीदी ने कहा शब्दों को हमेशा तोलमोल कर बोलना चाहिए। एक शब्द आरती बन जाते हैं तो दूसरा शब्द घाव कर देते हैं। जिस प्रकार ककड़ी के मुख्य को काटकर नमक लगाकर उसका कड़वा पन हटाया जाता है उसी प्रकार हमें अपने शब्दों में कड़वापन हटाना चाहिए। तपोभूमि में अभिषेक, शांतिधारा करने का सौभाग्य लविश महेश जैन परिवार, रमेश जैन, दिनेश जैन एवं गिरीश बिलाला को मिला इस मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल मोदी, सचिव दिनेश जैन, कोषाध्यक्ष इंदरमल जैन, उपाध्यक्ष विमल जैन, धर्मचंद पाटनी, राजेंद्र लुहाडिया, संजय जैन, ज्योति जैन उपस्थित रहे।