शिवराज को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया कांग्रेसी नेता के खिलाफ मानहानि का केस, सजा भी खत्म की

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुप्रीम कोर्ट ने झटका लगा है. दरअसल, चौहान द्वारा कांग्रेसी नेता और प्रदेश कमेटी के प्रवक्ता केके मिश्रा के खिलाफ दायर मानहानि के एक मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. व्यापमं घोटाले में केके मिश्रा ने सीएम चौहान और उनकी पत्नी पर घोटले में शामिल होने के आरोप लगाए थे.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केके मिश्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा रद्द करते हुए, ट्रायल कोर्ट के फैसले को भी निरस्त कर दिया. केके मिश्रा ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उनकी याचिका को मंजूर करते हुए कोर्ट ने आज इस पर अपना फैसला सुनाया. जिस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर. भानुमति की पीठ ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद कहा कि मिश्रा के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता. इसलिए कोर्ट ने ना केवल मामले को बल्कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को भी रद्द कर दिया.

व्यापमं घोटाले में लगे थे आरोप
बता दें कि 2014 में कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने मीडिया के सामने कहा था कि व्यापमं घोटाले में शिवराज सिंह चौहान और उनके परिजनों पूरी तरह शामिल हैं. उन्होंने एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री की ससुराल गोंदिया से 19 परिवहन निरीक्षकों की भर्ती हुई थी और इस भर्ती के लिए मुख्यमंत्री निवास से उनकी पत्नी साधना सिंह ने व्यापमं के आरोपी नितिन महिंद्रा समेत कई अधिकारियों को 129 फोन किए थे.

ट्रायल कोर्ट ने दी दो साल की सजा
केके मिश्रा के इन आरोपों के खिलाफ लोक अभियोजक ने मुख्यमंत्री की ओर से मानहानि का मुकदमा दायर किया था. 17 नवंबर, 2017 अपर सत्र न्यायाधीश ने मिश्रा को मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. हालांकि, सजा के कुछ समय बाद ही केके मिश्रा को जमानत मिल गई थी. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी अपील को खारिज कर दिया था.

इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. और अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मिश्रा के पक्ष में फैसला सुनाया. इस फैसले से जहां केके मिश्रा को राहत मिली है, वहीं शिवराज सिंह के झटका लगा है. क्योंकि इस साल मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और कोर्ट के इस फैसले से विरोधी दलों को बीजेपी पर हमला करने का एक मुद्दा हाथ लग गया है.