शिवराज सरकार ने दुष्कर्म पीड़िता को दिया था घर, कमलनाथ ने वापस लिया

इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने बुधवार को मंदसौर सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई आठ साल की बच्ची को आवंटित हुए घर को खाली करने का निर्देश दिया।

उसे शहर में एक घर और दुकान आवंटित हुई थी। अधिकारियों ने कहा कि उसे घर खाली करने का आदेश इसलिए दिया गया है कि क्योंकि पिछली भाजपा सरकार ने कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने पीड़िता के लिए पुनर्वास पैकेज की घोषणा की थी। जिसमें इंदौर में एक एक घर और दुकान आवंटन करना शामिल था।
आईडीए ने परिवार को जिला प्रशासन में एक घर आवंटित किया था और बच्ची के पिता को मंदिर स्थल में एक दुकान आवंटित की थी। बच्ची और उसके दो भाई बहनों को इंदौर के प्रतिष्ठित स्कूल में दाखिला कराया गया था।
8 साल की दुष्कर्म पीड़िता इस समय तीसरी कक्षा में पढ़ रही है। उसका 26 जून, 2018 को कथित तौर पर दो लोगों ने मंदसौर में दुष्कर्म किया था। उसका उसके स्कूल के पास से अपहरण किया गया था।
उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद आरोपी ने उसका गला काट दिया था और उसे मरने के लिए छोड़ दिया था। स्थानीय लोगों को बच्ची खून से लथपथ झाड़ियों में पड़ी हुई मिली थी।स्थानीय लोगों ने पुलिस को घटना की सूचना दी।
उसका इंदौर के सरकारी अस्पताल में पांच महीने इलाज चला। दोनों आरोपियों को दोषी पाया गया और उन्हें जुलाई 2018 में मौत की सजा मिली है।
लड़की के पिता ने कहा, ‘जब राज्य में भाजपा की जगह कांग्रेस सरकार बनी तो बहुत से लोगों ने मुझसे कहा कि मुझे मंदसौर जाना पड़ेगा क्योंकि सरकार बदल गई है। उनकी बातें सही हो गईं।
पिछली सरकार ने घर और दुकान के संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया था।’आईडीए के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एनएल महाजन ने कहा कि परिवार को पिछली सरकार द्वारा की गई घोषणा के बाद घर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘अभी तक इसे लेकर कोई औपचारिक आदेश नहीं है। हमें औपचारिक आदेश के बिना किसी को भी घर सौंपने का कोई अधिकार नहीं है। परिवार घर में नहीं रह रहा है।
घर को किराए पर दिया गया है ताकि कुछ पैसा मिल सके। उन्होंने मंदिर के पास घर किराए पर लिया है, जहां बच्ची के पिता को दुकान मिली है।’ बच्ची के पिता को डर है कि उसके बच्चों को अगले शैक्षणिक सत्र में स्कूल से निकाल दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘मैं 4.5 लाख रुपये की फीस नहीं दे सकता हूं।’ लड़की की मां ने कहा, ‘उस दर्द और पीड़ा को राजनेता भूल सकते हैं लेकिन हम अब भी काफी दर्द में हैं।

मेरी बेटी अब भी उस आघात से गुजर रही है। वह अब भी नींद में चिल्लाते हुए कहती है मम्मी बचाओ, मम्मी बचाओ।’