शिवरात्रि पूजन से भोलेनाथ देते हैं मनचाहा वरदान, जानिए इसकी कथा

भोलेनाथ को सर्वशक्तिमान और तीनों लोकों का स्वामी माना जाता है। छोटे से यत्न से वो प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को मनचाहा फल प्रदान करते हैं। यक्ष. गर्धव, राक्षस, दानव, मानव सभी को उन्होंने मनवांछित वरदान दिया है। साथ ही शक्ति का दुरुपयोग करने पर वो कठोर दंड देने से भी नहीं चूकते हैं। महादेव को जंगली फूल-पत्तों को समर्पित कर भी प्रसन्न किया जा सकता है। इसलिए श्रीशिव को भोलेनाथ कहा जाता है। शिवरात्रि के दिन महादेव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है और संचित पापों का नाश होता है। शिवरात्रि को शिवपूजा सांध्यकाल में करने का विशेष प्रावधान है।

शिवरात्रि की कथा

मान्यता है कि एक समय महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए। और उनका क्रोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि उनकी क्रोधाग्नि की वजह से धरती के जलकर भस्म होने का खतरा होने लगा। पृथ्वी के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देखते हुए देवी पार्वती ने महादेव के क्रोध को शांत करने का संकल्प लिया और उनके गुस्से को ठंडा करने के जतन में जुट गई। माता पार्वती ने महादेव से क्रोध का त्याग करने की प्रार्थना की और उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर भोलेनाथ का गुस्सा शांत हो गया। मान्यता है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रीशिव का गुस्सा शांत हुआ था, इसलिए इस दिन हर महीने शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि के व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है। दुख और कष्ट खत्म हो जाते हैं और पुत्र प्राप्ति के साथ धन-धान्य और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मा-विष्णु ने मांगी थी महादेव से माफी

शिवरात्रि की एक अन्य कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्माजी में मतभेद हो गए और दोनों एक – दूसरे को सर्वश्रेष्ठ बताने लगे। उसी वक्त श्रीशिव दोनों के बीट एक प्रकाशपुंज के रूप में प्रकट हुए और दोनों से प्रकाश स्तंभ के सिरे का पता लगाने को कहा। दोनों देवताओं ने सिरे का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन वो असफल रहे। ऐसे में दोनों को अपना गलती का अहसास हुआ और दोनों ने महादेव से माफी मांगी। इसलिए मान्यता है कि शिवरात्रि का व्रत करने से मन के विकारों का नाश होता है, अहंकार मिट जाता है और सभी वस्तुओं को समान रूप से देखने की शक्ति प्राप्त होती है।