शुजालपुर मंडी अस्पताल में है अव्यवस्थाओं का अंबार

घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे की है, जब एक 4 व्हीलर गाड़ी इर्टिगा एक पुलिया से नीचे उतर गयी। एक्सीडेंट ग़ैरखेड़ी के समीप हुआ है, सभी निवासी सीहोर के है जो कि गैरखेड़ी शादी म बारात लेकर जा रहे थे। सूत्रों के मुताबिक सभी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और अधिकारी बताए जाते है। पुलिया के पास उनकी गाड़ी एर्टिगा पलट गई, जिससे सभी 8 लोगो को चोंटे आयी है, जिसमे 2 गंभीर रूप से घायल है। जिला कांग्रेस प्रवक्ता हसन रज़ा कुरेशी, पार्षद प्रवीण जोशी एवं पार्षद प्रतिनिधि संजय बरेठा ने मरीजो को अस्पताल पहुंचाया और आगे रहकर उनका ट्रीटमेंट करवाया। उस समय अस्पताल में मौजूद 1 डॉक्टर 1 नर्स और 1 सहायक मौजूद थे जिन्होंने घायलों को फर्स्ट एड ट्रीटमेंट देकर रेफर करने का कहा ऐसे में उपस्थित आमजन नाराज़ भी हुए कि 2 लोग गंभीर है बाकी 6 लोगो का तो यहां ट्रीटमेंट हो सकता है, लेकिन डॉक्टर ने ये बोलकर कि अस्पताल में व्यवस्था नही है और स्टाफ की कमी है, हम इन सब मरीजो को यहां नही रख सकते कहकर रेफर कर दिया गया।

लेकिन वहां उपस्थित जनो ने जिसमे हसन रजा कुरैशी, प्रवीण जोशी, संजय बरेठा सहित कुछ लोगो ने घायलों को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया। जहाँ उनका ट्रीटमेंट हुआ। 2 लोगो की हालत गंभीर देखकर उनको फ़ौरन शहर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। बाद में बाकी 6 मरीज का भी प्राइवेट अस्पताल में उपचार हुआ। जिसमे घायलों को लेकर शुजालपुर के शासकीय अस्पताल मंडी लेकर जाने में और उनका उपचार कराने मे मदद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता पार्षद प्रवीण जोशी, हसन रजा कुरैशी और पार्षद प्रतिनिधि संजय बरेठा ने इंसानियत की मिसाल पेश कर एक मैसेज दिया साथ ही शुजालपुर में बने आलीशान सिविल अस्पताल शुजालपुर मंडी की पोल खोलकर रख दी।

इमरजेंसी केस में भी मरीज को संभालने वाले ऐसे चिकित्सक की कमी के कारण और स्टाफ की कमी के चलते उन सबको मजबूरन एक प्राईवेट अस्पताल ले जाना पड़ा बड़े दुख का विषय है, ऐसे में अखिल भारतीय कांग्रेस सेवा दल पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र जोशी जी ने भी डॉक्टर को कॉल करके उनको अस्पताल जाने के लिए प्रेरित किया, उनके फ़ोन काल पर एक ऑफ ड्यूटी डॉक्टर आशुतोष गुप्ता भी सिविल अस्पताल पहुँचे। और उन्होंने अपना डॉक्टर धर्म निभाकर दूसरे अन्य डॉक्टर के लिए मिसाल पेश की कि ऑफ ड्यूटी होकर भी घर से उठकर सिविल अस्पताल मंडी पहुंच गए।

जबकि इमरजेंसी में भी ऑन ड्यूटी पर भी अस्पताल नही पहुँचने वाले डॉक्टर प्राइवेट अस्पताल में मरोजो को देखते हैे, इन सबके बावजूद अस्पताल में व्यवस्थाओं की कमी और स्टाफ की कमी के चलते सिर्फ फर्स्ट एड ट्रीटमेंट करके उनको रेफर करने का बोला गया, यहाँ तक कि किसी को बेड पर भी नही लिटाया गया। किसी को चेयर पर बैठा दिया गया तो कोई आलीशान पथ्थर से बने सिटिंग चेयर पर लेटा हुआ था। बड़े दुःख की बात है कि बिल्डिंग तो बहुत बड़ी और आलीशान बना दी गयी सिविल अस्पताल की। लेकिन स्टाफ की कमी और व्यवस्थाओं के न होने के चलते ये सिविल अस्पताल जिन्दा लाश के बराबर है, आखिरकार किसी की जान पर न बन आये इसलिए सभी 8 मरीजो को मजबूरन प्राइवेट अस्पताल लेकर जाना पड़ा।