श्रावण के पहले सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर प्रजा का हाल जानने निकले

शाजापुर। सावन के पहले सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर महादेव रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। मंदिर में विशेष साज-सज्जा की गई थी। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नगर के न केवल ओंकारेश्वर मंदिर वरन् तालाब की पाल स्थित जयेश्वर महादेव, गायत्री नगर स्थित नीलकंठेश्वर, सोमवारिया बाजार स्थित सोमेश्वर राजराजेश्वरी देवी मंदिर के पीछे स्थित मंगलनाथ महादेव सहित विभिन्न भेलेनाथ के मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर शिव लिंग को विशेष रूप से शृंगारित किया गया था।

विगत कई दिनों से धान मंडी स्थित ओंकारेश्वर महादेव की प्रथम सवारी को लेकर व्यापक तेयारियां चल रही थी। याद रहे कि चीलर नदी के किनारे स्थित यह मंदिर नगर के प्राचीनतम मंदिरों में गिना जाता है। बताते हैं कि इसका निर्माण लगभग 300 वर्ष पूर्व हुआ था, जबकि मंदिर में स्थापित शिवलिंग इससे भी पुराना कहा जाता है। इतिहासकार बताते हैं कि यह शिवलिंग चीलर नदी में स्नान करते समय एक ब्राह्मण को मिला था।

जिसने एक छोटा सा मंदिर बनाकर उसी में यह शिवलिंग स्थापित कर दिया। बाद में अनेक मौको पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा। यह सवारी धानमंडी, वजीरपुरा, भावसार मोहल्ला, लालपुरा, मगरिया, सोमवारिया, आजाद चौक और किला रोड होते हुए पुन: ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची। विभिन्न चौराहों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए और महिलाओं ने बिल्वपत्र एवं पुष्प अर्पित कर पूजन किया।

धानमंडी स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में महादेव का चांदी के वर्क से आकर्षक शृंगार किया गया। राजराजेश्वरी देवी मंदिर के पीछे स्थित मंगलनाथ महादेव मंदिर में शिवलिंग का आकर्षक शृंगार किया गया। जहां बाबा की पूजा अर्चना व दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।