श्रीराम कथा में शिव विवाह, छाया उत्सव का उल्लास

निकली बारात, भक्तों ने की पुष्पवर्षा
उज्जैन। मन से बड़ा मित्र नहीं, मन से बड़ा दुश्मन नहीं, मन चंचल है, मन चारों तरफ जाता है, मन अगर भगवान में लगा देवे तो वह अच्छाई ही देगा। संतान भगवान की कृपा से मिलती है चाहे बेटा या बेटी हो परंतु जो भेदभाव करते हैं वह ईश्वर की अवज्ञा करते हैं, अवहेलना करते हैं।
यह बात विश्व विराट मानव कल्याण सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट गुजरात द्वारामहामंडलेश्वर महावीरदास महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्रीराम कथा में तीसरे दिन नृसिंह दासजी ने शिव पार्वती विवाह उत्सव एवं राजा हिमालय की कथा का वर्णन करते हुए कही। कथा में शिव विवाह के तहत शिव बारात निकाली गई जहां सभी धर्मालुजनों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। आयोजन समिति के रवि राय ने बताया प्रारंभ में व्यासपीठ का पूजन अर्चन पं. वरुण शर्मा, भारती शर्मा ने किया। कथा समापन पर आरती महामंडलेश्वर श्रीमहंत रामेश्वरदास महाराज, महंत हरिहर रसिक, महंत मुनि शरणदास, ऊर्जा मंत्री पारस जैन, पूर्व विधायक रामलाल मालवीय, मुख्य यजमान हरिसिंह यादव, पोरवाल समाज अध्यक्ष धन्नालाल पोरवाल, राम स्पोर्ट्स संगठन अध्यक्ष मुरलीधर शर्मा, अजीत मंगलम, मोहन जायसवाल, पं. नितिन शर्मा, जानकीलाल परमार, पं. अनिरुद्ध पांडे ने की।