श्री आदिनाथ दिगंबर जैन सातिशय जिन चौबीसी मंदिर में आदर्शमती एवं दुर्लभमती मसा ने कहा

अधिकांश कन्याएं पढ़-लिखकर खुद को बहुत बड़ा समझने लगी हैं, उनमें लगभग समाप्त हो गई है विवेक और मर्यादा

उज्जैन। वीतराग भगवान के सम्मुख आना हो तो हनुमान की तरह भक्त बनकर आना चाहिये। मंदिर में शिखर मात्र के दर्शन से अंतरंग भाव गदगद हो जाते हैं। हम सबके जीवन में अहंकार प्रवेश कर गया है, सब का पता याद है, खुद का पता याद नहीं है।

अधिकांश कन्याएं ज्यादा पढ़ लिखकर अपने आपको बहुत बड़ा समझने लग जाती हैं। उनमें विवेक, मर्यादा जो कि नारी का पहला आभूषण है लगभग समाप्त हो गई है। हमारे विवाह समारोह में बहुत सारी विक्रतियां आ गई हैं। पुराने जमाने के विवाहों में एवं आज के विवाहों में जमीन आसमान का अंतर आ गया है।

यह बात आर्यिका आदर्शमती माताजी की संघस्थ विदुषी दुर्लभ माताजी संघस्थ 10 माताजी ने श्री आदिनाथ दिगंबर जैन सातिशय जिन चौबीसी मंदिर ऋषिनगर में कही। रविवार सुबह 8.30 बजे आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का पूजन हुआ।

इसके बाद माताजी द्वारा प्रवचन दिये गये। सुबह करीब 10 बजे आहार चर्या, दोपहर 3 बजे के लगभग कक्षा का आयोजन हुआ। दीप प्रज्वलन आरके जैन ने किया। चित्र अनावरण डॉ. ऋषभ जैन ने किया एवं मंगलाचरण जिनेन्द्र जैन एवं पाठशाला के बच्चों ने किया।