संतों की कृपा द्वारा ही ईश्वर की प्राप्ति संभव – साध्वी पदमहस्ता भारती

दादा देव मेला ग्राउंड, नज़दीक दादा देव मंदिर, सैक्टर-7, द्वारका, दिल्ली में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीरामकथामृत के अन्तर्गत सर्वश्री आशुतोष जी महाराज की शिष्या साध्वी पदमहस्ता भारती जी ने ‘शबरी-प्रसंग’ में भक्तिमति शबरी के विवाह के समय की घटना के बारे में बताते हुए कहा कि उस समय शादी में बहुत से बकरों व भेड़ों की बलि चढ़ाकर बारातियों आदि के लिए भोजन की व्यवस्था का प्रचलन था। यह बात जानकर शबरी अत्यंत दुखी हुई। क्या मेरे कारण इन मासूम पशुओं को मरना पडे़गा! ऐसा क्रूर व्यवहार! नहीं, इन्हें भी तो ईश्वर ने ही बनाया है, इनकी हत्या से परमात्मा क्या खुश होगा? परन्तु वह चुपचाप इसे बर्दाशत भी कैसे कर सकती थी। वह शादी के एक रात पहले ही गृहत्याग कर ईश्वर को अपने जीवन का सहारा बना जंगलों में निकल जाती है।

परन्तु संतों की कृपा को प्राप्त कर ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। यह जानकर वह संतों की सेवा में लग जाती है। विदुषी जी ने बताया कि भक्तिमति शबरी ने यहाँ प्रेम, त्याग व जीवन के वास्तविक कर्तव्य का महान आदर्श रखा। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने कथामृत का आनन्द उठाया तथा सुप्रसिद्ध गायकों द्वारा गाए गए सुमधुर भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया।