संस्कृत जनपद सम्मेलन में दिव्य ज्योति वेद मंदिर की सहभागिता

संस्कृत भारत की आत्मा है। यह भाषा ही भारतीय संस्कृति की संवाहिका है। वर्तमान समय में संस्कृत भाषा को व्यवहारिक भाषा बनाने हेतु निरन्तर नियमित रूप से संस्कृत भारती कार्यरत है। इसी कड़ी में संस्कृत भारती की दिल्ली स्थित झंडेवालान शाखा द्वारा 11 फरवरी को दिल्ली स्थित रोहिणी सेक्टर-5 के बाबा बंदा सिंह बहादुर सामुदायिक केन्द्र में संस्कृत जनपद सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में विविध जनपदों की संस्थाओं ने भाग लिया।

मुख्य रूप से सहभागी संस्था के रूप में दिव्य ज्योति वेद मंदिर ने सक्रिय भूमिका निभायी। वैदिक संस्कृत के प्रसार एवं वेद मंत्रोच्चारण की मौखिक परम्परा को कायम रखने हेतु दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा दिव्य ज्योति वेद मंदिर की स्थापना की गई। वैदिक संस्कृत की प्राण है संस्कृत भाषा, यह प्राण वायु गतिशील रहे इसलिए गुरुदेव के पावन मार्गदर्शन के तहत दिव्य ज्योति वेद मंदिर के प्रांगण में संस्कृत भाषा की शिक्षण – प्रशिक्षण कक्षाएँ नियमित रूप से चलायी जाती है। इन प्रशिक्षित बच्चों द्वारा इस सम्मेलन की शोभा बढायी गई। दिव्य ज्योति वेद मंदिर के बच्चों ने अपने विविध प्रस्तुतियों जैसे संस्कृत भाषण, संस्कृत गीत व नृत्य द्वारा सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. परमेश्वर अरोड़ा जी (वरिष्ठ सलाहकार, सर गंगा राम हॉस्पिटल, दिल्ली), साध्वी अनीशा भारती जी (मंथन प्रकल्प कार्यकर्ता, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान), जय प्रकाश गौतम जी (क्षेत्रीय संगठन मंत्री, संस्कृत भारती) और कौशल किशोर तिवारी जी (मंत्री, संस्कृत भारती) तथा अन्य अतिथि के रूप में डॉ. विजय जी ( शिक्षण प्रमुख, दिल्ली प्रान्त), देवदत्त दुबे जी (विभाग संयोजक ), स्वामी नरेशानंद जी (प्रचारक, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान) मौजूद थे| इन्होनें सर्वप्रथम दिव्य ज्योति वेद मंदिर के बच्चों की अनुपम प्रस्तुतियों की सराहना की।

अनन्तर उन्होंने संस्कृत भाषा के महत्व आधुनिक जीवन में इसकी उपयोगिता को प्रकाशित करते हुए बताया कि संस्कृत से संस्कार उत्पन्न होता है, संस्कार से संस्कृति और संस्कृति से ही हमारे राष्ट्र भारत का अस्तित्व है। इसके अतिरिक्त सम्मेलन में लघु पुस्तक प्रदर्शनी स्टॅाल भी लगाये गए। इन स्टॅाल पर उपलब्ध पुस्तकों द्वारा सरलता से व्यवहारिक संस्कृत को सीखा जाता है। कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन में उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि संस्कृत भाषा को जन भाषा बनाने हेतु वे निरंतर इसके प्रचार – प्रसार में संलग्न रहेंगे। दिव्य ज्योति वेद मंदिर के बच्चों व कार्यकर्ताओं ने भी इस संकल्प को साकार करने हेतु तत्पर हो उठे।