सत्य के अभाव में आनंद की कल्पना व्यर्थ

सत्य के अभाव में आनंद की कल्पना करना व्यर्थ है। सत्य परमात्मा का स्वरूप है, सत्य अनंत है। यह धरती सत्य के उपर ही टिकी है। जिनको भी परमात्मा प्राप्त हुए उन्हें सत्य के मार्ग से ही मिले। अगर यह संसार भवसागर है तो उनसे पार होने के लिए सत्य से श्रेष्ठ कोई नाव नहीं है। सही अर्थ में राम कथा का सार ही प्रेम है। सभी धर्मों का सार सत्य, प्रेम और करुणा है। रामकथा संजीवनी है।

यह बात मानस भवन क्षीरसागर पर आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा में पं. सुधीर पंड्या ने कही। कथा के प्रारंभ में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमृतलाल अमृत, दिनेश सुखनंदन जोशी, पं. संजय व्यास, पं. संतोष शर्मा ने श्रीराम दरबार का पूजन किया एवं आरती की।