सपने देखने के लिए उम्र बाधा नहीं बन सकती

आर्थिक आत्मनिर्भरता का सफर किसी भी उम्र में शुरू किया जा सकता है, इस बात को साबित किया है, 94 साल की हरभजन कौर ने।

क्या है  उनकी सफलता की अनूठी कहानी,साझा कर रही हैं सुमन बाजपेयीअ की एक लंबी दुनिया का सफर करता हुआ, स्वाद, रंगत और खुशबू से महकता बर्फी का एक टुकड़ा जब मुंह में जाता है तो कुछ पल लग जाते हैं उस एहसास से बाहर आने में। सही मात्रा में सारी सामग्रियां और ढेर सारा प्यार व जी-जान लगाकर बनाई गई कोई भी चीज निस्संदेह उत्कृष्ट ही होगी। बाजार में हर दुकान पर बेसन की बर्फी मिलती है, पर कुछ तो खास है हरभजन कौर की बेसन की बर्फी में, जिसे खाने के लिए लोग लालायित रहते हैं।

उम्र को दी मात-
इस बेसन की बर्फी को बनाने की रेसिपी 100 साल पुरानी है और इसे बनाने वाली हरभजन कौर खुद इस समय 94 साल की हैं। 90 वर्ष की उम्र में उद्यमी बनी हरभजन कौर से बात करने पर यह नहीं लगा कि किसी बहुत बुजुर्ग महिला से बात हो रही है। स्पष्ट शब्द, आत्मविश्वास और लगातार कुछ करते रहने की जिजीविषा–हौसलों के साथ मेहनत को अहमियत देने वाली हरभजन कौर चंडीगढ़ में रहती हैं और रोज बेसन की बर्फी बनाती हैं। इसके अलावा वह बादाम का शरबत, लौकी की आइसक्रीम, टमाटर की चटनी, दाल का हलवा, अचार, आदि भी बनाती हैं।

वह कहती हैं,‘‘चार साल पहले ऐसे ही मैंने अपनी बेटी से कहा कि तुम सब अपने-अपने कामों में व्यस्त रहते हो, पर मैं क्या करूं। खाली बैठे-बैठे न तो मेरा लगता है, न ही वक्त कटता है। तब मेरी बेटी ने पूछा कि क्या आपको किसी बात का अफसोस है, आपकी कोई इच्छा है जिसे पूरी करना चाहती है। मैंने कहा बस एक बात का मलाल है कि मैंने कभी एक भी पैसा नहीं कमाया। उसने तब सलाह दी कि आप बेसन की बर्फी बनाओ। मैंने शुरू में बर्फी जिसे मैंने अपने पिता से बनाना सीखा था और टमाटर की चटनी बनाई। चंडीगढ़ की ऑरगैनिक मंडी में एक स्टॉल लगाया तो हाथों हाथ दोनों चीजें बिक गईं। 4500 रूपए की वह पहली कमाई जब हाथों में आई तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा।

शुरू हुआ एक नया सफर-
सबको लगा कि अब सिलसिला यहीं रुक जाएगा, पर यह तो शुरुआत थी और उन्होंने ठान लिया कि वह अपने इस काम को आगे बढ़ाएंगी। वह हर हफ्ते लगने वाली ऑरगैनिक मंडी में अपना स्टॉल लगाने लगीं। इस तरह उनके नाम का ब्रांड बना जो आज ‘हरभजन्स-बचपन याद आ जाए’ के नाम से प्रसिद्ध है। ‘‘उसके बाद तो मैं रोज बर्फी बनाने लगी। हालांकि एक-दो किलो ही बनाती थी, पर धीरे-धीरे मुहल्ले-पड़ोस, परिचितों तक बर्फी की शोहरत पहुंचने लगी और इस तरह मेरा हौसला और बढ़ गया। मैं पूरे जोश से बर्फी के अलावा और चीजें भी ऑर्डर पर अपने घर की रसोई में बनाने लगी। मैं रोज बर्फी बनाती हूं, लेकिन मुझे न तो बोरियत होती है, न ही थकान। बल्कि काम करने से मेरे अंदर एक जोश कायम रहता है,’’ हरभजन कौर की आंखों में यह कहते-कहते एक चमक आ गई थी।

घर में धीमी आंच पर भुने बेसन की बर्फी के लिए आज चंडीगढ़ से ही नहीं, दूसरे शहरों से भी ऑर्डर आते हैं। उनके बिजनेस के पैर्केंजग व ब्राडिंग का काम देखने वाली उनकी नातिन मल्लिका सूरी कहती हैं कि ‘‘टैग लाइन बनाने के बाद अब मैं र्पैंकग के लिए खास बॉक्स डिजाइन करवा रही हूं, ताकि बर्फी को दूर-दूर शहरों तक भेजा सके। मेरी शादी में 220 किलो बर्फी घर पर ही बनी थी, और नानी के इस प्यार को मैं सदा याद रखूंगी।’’

स्वाद परोसती हैं खाने में-
हरभजन कौर को चूंकि खाना बनाना शुरू से ही अच्छा लगता था, इसलिए उनके बच्चों ने कभी बाहर का खाना खाया ही नहीं। हर चीज वह घर में ही बना देतीं। उनकी बेटी रवीना सूरी उत्साह से कहती हैं, ‘‘हमने न बचपन में और न कभी बड़े होने पर बाहर जाकर खाना खाया। यहां तक कि चॉकलेट भी हमने बाजार से खरीद कर नहीं खाई। मां खाने में एक स्वाद परोसती हैं और इतनी उम्र होने के बाद भी उनका नए-नए तरह के व्यंजन बनाने का जोश बरकरार है। जिसे देखकर हमें ही नहीं, हर किसी को हैरानी होती है। हमारी बचपन की यादों में बेसन की बर्फी बहुत गहरे तक जुड़ी थी, इसीलिए मैंने उनसे इसे ही बनाने का सुझाव दिया था। और आज यह सबसे ज्यादा बिकने वाली मिठाई है।’’

सपनों को पूरा किसी भी उम्र में किया जा सकता है-
उम्मीदों और दूसरों को प्रेरणा देने का उनका 90 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ सफर तब सबके लिए चर्चा का विषय बना था जब र्मंहद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद र्मंहद्रा ने ट्विटर पर उन्हें ‘एंट्रेप्रेनियर ऑफ द ईयर’ कहा था। सच ही है उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि सपने और जुनून का पीछा करना हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है। वह मानती है र्कि ंजदगी में जंग लगे, उससे बेहतर है कि हमें काम करते रहें, चाहे थकान भी हो। क्योंकि थकान तो आराम करने से दूर हो जाएगी, पर जंग लग गया तो हम टूट ही जाएंगे। हरभजन केवल काम करना चाहती है, न कि खुद को साबित। न तो वह बड़े पैमाने पर बिजनेस करना चाहती हैं, न ही किसी से होड़। केवल घर से ही वह आज भी सारे ऑर्डर पूरा करती हैं और स्वाभिमान और आत्मसम्मान के साथ जी भर कर जीने की प्रेरणा देती हैं।

मेहनत ही मूलमंत्र है-
हरभजन कौर का मानना है कि जीवन का मतलब है हमेशा कुछ नया करते रहने। जब कुछ नया करोगे तभी तो कुछ नया सीखोगे। वह कहती हैं कि नई पीढ़ी से यही कहना चाहती हूं कि केवल मेहनत से ही सफलता मिलती है। वक्त बेकार करने से अच्छा है, निरंतर कुछ नया करते रहो। दिलचस्प बात तो यह है कि वह बर्फी बनाने की सारी प्रक्रिया को खुद करती हैं। न घर के किसी सदस्य, न ही किसी सहायक की व