सफलता के तीन मंत्र- विश्वास, मेहनत और सब्र

धीरजलाल हीराचंद अम्बानी (धीरूभाई अम्बानी) का जन्म 28 दिसंबर 1932 को ब्रिटिश इंडिया के जूनागढ़ एस्टेट में एक मोध बनिया परिवार में हुआ। उनके पिता एक अध्यापक थे और माता कुशल गृहणी थी। आर्थिक तंगहाली की वजह से उन्हें हाईस्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर एक भजिए की दुकान लगानी पड़ी। जिससे बमुश्किल ही घर का खर्चा निकल पाता था। सन 1948 में सोलह साल की उम्र में वे अपने बड़े भाई रमणिकलाल की सहायता से यमन के एडेन शहर में ‘ए. बेस्सी और कंपनी’ में 300 रुपये प्रतिमाह के वेतन पर काम किया। लेकिन इस काम से उन्हें संतुष्टी नहीं मिल पा रही थी।

सफलता की शुरूआत

1950 के शुरुआती दशक में वापस भारत आकर अपने चचेरे भाई के साथ पॉलिएस्टर धागे और मसालों के आयात-निर्यात का व्यापार किया। लेकिन चचेरे भाई और उनके काम करने के तरीकों में अंतर की वजह से यह व्यापार भी बंद करना पड़ा। लेकिन धीरूभाई ने हार नहीं मानी और फिर से पूरे विश्वास के साथ 1966 में विमल ब्रांड के नाम से एक कपड़ा मील खोली। उन्होंने विमल ब्रांड को देशभर में खूब प्रचारित किया, जिसकी वजह से भारत भर में यह जानामाना ब्रांड बन गया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने रिलायंस टेक्सटाइल्स को बढ़ाकर पेट्रोरसायन, दूरसंचार, बिजली, रिटेल, पूंजी बाजार आदि में मेहनत कर सफलता प्राप्त की। धीरे-धीरे उन्होंने बुलंदियों को छू लिया और भारत के दिग्गज उद्योगपति बन गए। आज रिलायंस इंडस्ट्री भारत की सबसे बड़ी कंपनी है।

कहानी से सीखः
1. कोई भी असफलता अंत नहीं होती, बल्कि लगातार मेहनत कर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
2. सफल बनने के लिए समय लगता है, इसलिए विश्वास, मेहनत और सब्र का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
3. कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए, संतुष्टी सफलता की बाधक है।