सफल होने के लिए चुनौतियों का सामना करें

एक किसान की प्रार्थनाओं से भगवान प्रकट हो गए। उन्होंने कहा कि बता तुझे क्या मांगना है? किसान ने कहा-आप कहते हैं तो मांग लेता हूं। आपने दुनिया बनाई होगी, लेकिन खेती-बाड़ी नहीं आती आपको। जब पानी चाहिए तो निकलती है धूप। जब फसल खड़ी होने को आती है, तो अंधड़, तूफान, पाला चला आता है। एक बार मुझे मौका दो तो दिखलाऊं कि खेती-बाड़ी कैसे की जाती है? भगवान राजी हो गए।

उन्होंने कहा इस साल जो तू चाहेगा वही होगा। हुआ भी वही। अंधड़-ओले नहीं चाहे, तो नहीं आए। फसल पकी, पर गेहूं नहीं आए।

बाहर से ठीक लेकिन भीतर से खोखले। भगवान आए तो उसने पूछा-ये क्या है? भगवान बोले-तूने अच्छा-अच्छा मांगा, सो दिया। पर पौधों को अंधड़, तूफान सब झेलना पड़ता है। वह नहीं हुआ तो उनकी जड़ें कैसे मजबूत होतीं? इसका अर्थ ये है कि हमें भी मजबूत होने के लिए चनौतियों का सामना करना पड़ता है। उसे झेल कर ही हम सफल हो सकते है। इसलिए कभी हार न मानें और चुनौतियों का डट के सामना करें।