समस्याएं जीवन को जीने लायक बनाती हैं, हमें आग में तपा सोना

जीवन के लिए तीन चीजें बहुत मायने रखती हैं – कितने प्रेम से जिए, दूसरों को कितना प्रेम दिया अैर जीवन-प्रवाह को कितने साक्षी भाव से निहारा। इन तीनों के सहारे आप जिंदगी को खुशनुमा, सरल और सुंदर बना सकते हैं। आप किसी बगीचे में जाएं और वहां एक ही रंग के फल-पौधे दिखाई दें तो उनका सौंदर्य आपको प्रभावित नहीं कर पाएगा। जहां विविध प्रकार के फल और पौधे हों, वहां का सौंदर्य सहज ही मन को आकर्षित करने वाला होता है। विविधता सबके मन को भाती है।

ईरानी डायरेक्टर माजिद माजीदी की एक फिल्म है – ‘द सॉन्ग ऑफ स्पैरोज यानी गोरैया का गीत। माजीदी ने इस कहानी के जरिए बताया है कि इंसान जब अपने घर से, अपने गांव से बाहर निकलता है, तो वह किस तरह से अपनी सरलता को खो देता है। सरलता को खो देना प्रेम को खो देना है। रवींद्रनाथ टैगोर ने सही कहा है कि खुश रहना बहुत सरल है, किंतु सरल बने रहना बहुत मुश्किल है। हाथ में पांच उंगलियां हैं। ये लंबाई और आकार में भिन्नता की वजह से अच्छी लगती हैं। अगर पांचों समान लंबाई और आकार की होतीं तो कैसा लगता/ और यह भी सत्य है कि पांचों में भिन्नता है, इसीलिए वे कार्यकारी हैं। अगर समान लंबाई की होतीं तो पंजे की पकड़ उतनी नहीं हो सकती थी। अंगूठा चार अंगुलियों से पृथक है और वह किसी भी चीज को पकडऩे में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता है। सौंदर्य वहीं है, जहां अनेकता है, भिन्नता है।

अपनी प्रियता और अप्रियता को संयम से बांध कर रखा जा सकता है, किंतु ऐसा आम तौर पर होता नहीं और यही बात टकराव का कारण बनती है। सहन करना सीखें। वह जीवन भी क्या जो समस्यामुक्त हो। ऐसा जीवन आदमी को अकर्मण्य बना देता है।इतिहास गवाह है कि इस दुनिया में जो भी महापुरुष हुए, चर्चित व्यक्तित्व हुए, वे सब संघर्षों की आंच में तप कर कुंदन बने। इसलिए कोई भी समस्यामुक्त जीवन की कामना न करे।

कामना करे कि संघर्षों और समस्याओं से लोहा लेने का सामर्थ्य अर्जित हो। मनुष्य जीवन पाकर कोई स्वयं को असमर्थ और अशक्त अनुभव क्यों करे/ प्रवाहपाती बनना मनुष्य जाति को शोभा नहीं देता। प्रवाह में तो भेड़ें बहती हैं। निदा फाजली ने बहुत अच्छा कहा है कि ‘बच्चों के छोटे हाथों को चांद सितारे छूने दो, चार किताबें पढ़कर वो भी हम जैसे हो जाएंगे। अक्सर कहा जाता है कि लोग एक सूत्र में बंधे रहना चाहते हैं, किंतु राजनीति परस्पर विभेद पैदा कर लोगों को बांटदेती है। यह बात पूर्णत: सत्य नहीं है। अगर आप पक्के हैं तो कोई आपको बरगला या फुसला कर आपके विचारों में परिवर्तन नहीं कर सकता। महात्मा बुद्ध ने कहा भी है, ‘आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाता खुद आपके सिवाय। खुद से प्रेम करें।

ललित गर्ग