सिर चढ़ने लगे सफलता, तो संभलकर चलना ही बेहतर

हाल में एक इंटरव्यू में फिल्म निर्माता और पटकथा लेखक सलीम खान से पूछा गया कि जब ‘जंजीर’ हिट हुई तो क्या हुआ? वह बोले,‘होना क्या था? दिमाग खराब हो गया। इतनी सफलता देखी नहीं थी। समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है? चारों ओर से काम आ रहा था।’

सफलता भले ही धीरे-धीरे आती है, पर दिमाग पर जल्दी ही चढ़ जाती है। ज्यादातर को सफलता पाने के बाद उसे पचाने में दिक्कत ही होती है। सफलता की सीढ़ियां चढ़ते समय यह याद रखना होता है कि हम क्या हैं, हमारी जड़ें क्या हैं? अपनी जड़ों को छोड़ना, हमें दूसरों की उस जमीन पर खड़ा कर देता है, जहां हमारी पकड़ नहीं है।

कब सिर चढ़ती है सफलता

बैठे-बिठाए सफलता किसी को नहीं मिलती। किन्हीं कारणों से मिल जाए तो देर तक टिकती नहीं। हर समय उसके खोने का डर सताता रहता है। फिर जितनी भी सुविधाएं हों, जान-पहचान वाले हों, दौड़ में बने रहने के लिए खुद पर काम करना ही पड़ता है। फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप की मानें तो देर तक आप खुद को पीड़ित बताकर दूसरों के संघर्ष को नकार कर या फिर बदले की भावना रखते हुए आगे नहीं बढ़ सकते।

हमें यह याद रखना चाहिए कि सफलता के रास्ते पर हमेशा काम चलता रहता है। सफलता यात्रा है, मंजिल नहीं। कुछ देर रुकना, ठहरना, उस सफलता की खुशी मनाना उस यात्रा के पड़ाव भर हैं। कुछ देर के बाद वापस काम में जुटना ही होता है।

किताब ‘इगो इज एनिमी’ में लेखक रेयान हॉलिडे लिखते हैं, ‘अहंकार सफलता और संतुष्टि दोनों का दुश्मन है। इस पर कड़ी नजर बनाए रखना जरूरी है।’

सफल लोगों को गौर से देखें तो पाएंगे कि वे देर तक किसी बात पर अटकते नहीं। क्या मिला, क्या नहीं- हमेशा इसकी शिकायत नहीं करते। सीखते रहते हैं। अपने लक्ष्य को नहीं भूलते। दूसरों की सुनते हैं, पर उनके डर को खुद पर हावी नहीं करते। अच्छी बात यह है कि हम मनुष्यों में ही यह क्षमता है कि हम अपनी कमियों को देख सकते हैं। उन्हें सुधार सकते हैं। इसलिए अर्श से फर्श पर गिरने के बाद भी फिर से संभल जाते हैं।

सफलता के सफर में याद रखें यह टिप्स
अपनों का साथ न छोड़ें। अपनी जड़ों व मानवीय मूल्यों को न भूलें।

दूसरों के काम की प्रशंसा करें। टीम को भी श्रेय दें। उनके समय, संघर्ष और कोशिशों की कद्र करें।

बॉस, सीनियर, जूनियर, छोटे-बड़े सबसे ढंग से बात करें। सबका सम्मान करें।

दूसरों को भी सुनें। लगातार सीखते रहें। अपनी गलती पर माफी मांगने में देर न करें।
अनुशासित बनें। अपनी दिनचर्या में खान-पान, व्यायाम और आराम को भी जगह दें।

अपनी कमाई और अनुभव का एक अंश दूसरों की भलाई में लगाएं। तारीफ और कमी, दोनों को सुनने की आदत डालें।