सीएम की सख्ती, उज्जैन कलेक्टर और संभागायुक्त को हटाया

शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन में श्रद्धालुओं द्वारा क्षिप्रा नदी में पानी के अभाव में कीचड़ में स्नान करने के मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर एवं संभागायुक्त को हटा दिया है। साथ ही जल संसाधन एवं एनवीडीए के अफसरों पर भी तबादले की गाज गिरी है। दरअसल, राज्य शासन ने उज्जैन कलेक्टर मनीष सिंह और संभागायुक्त एमबी ओझा को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उनके स्थान पर शशांक मिश्रा को उज्जैन का नया कलेक्टर बनाया है। साथ ही उच्च शिक्षा आयुक्त अजीत कुमार को नया संभागायुक्त बनाया है ।

श्रद्धालुओं के कीचड़ स्नान मामले में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रिपोर्ट तलब की थी। आज सुबह मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने मुख्यमंत्री को पूरी घटना से अवगत कराया। रिपोर्ट में शनिचरी अमावस्या पर क्षिप्रा में पानी उपलब्ध नहीं कराने के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदारी ठहराया। इसके बाद अफसरों पर कार्रवाई की है।

ये है पूरा मामला
शनिवार को साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या थी और शिप्रा पूरी तरह से सूख चुकी थी, ऐसे में श्रद्धालुओं के नहाने के लिए प्रशासन ने फव्वारों से स्नान का इंतजाम किया था लेकिन ऐनवक्त पर ज्यादातर फव्वारे बंद हो गए। श्रद्धालुओं ने कीचड़ से सने पानी के शरीर पर छींटे डालकर अमावस स्नान की औपचारिकता पूरी की। इस पर श्रद्धालुओं का जमकर गुस्सा फूटा और उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि नई सरकार तो ठीक से स्नान भी नहीं करा पाई है। जिसके बाद मु्ख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे और फिर यह कार्रवाई की गई।

मुख्यमंत्री ने दिए थे जांच के आदेश
इस घटना की सूचना जैसे ही बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास पहुंची। उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को उक्त पूरे मामले की जाँच कर तुरंत रिपोर्ट देने को कहा । वही उन्होंने अधिकारियों से सवाल पूछते हुए कहा था कि जानकारी होने के बाद भी श्रद्धालुओं के स्नान की माक़ूल व्यवस्था क्यों नहीं की गयी ? नर्मदा का पानी क्षिप्रा नदी में क्यों आ नहीं पाया ?इसके पीछे क्या कारण है ? किसकी लापरवाही है ? पूर्व से ही सारे इंतज़ाम क्यों नहीं किये गये ? पूरे मामले की जाँच हो ।लापरवाही सामने आने पर दोषियों पर कार्यवाही हो।मेरी सरकार में धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ का कोई भी छोटा सा मामला भी में बर्दाश्त नहीं करूँगा। मकर सक्रांति व भविष्य में इस तरह की परिस्थिति दोबारा निर्मित न हो।