सोयाबीन-चने के भाव गिरने से फूटा किसानों का आक्रोश, नीलामी का कर दिया बहिष्कार

उज्जैन। कृषि उपज मण्डी में सुबह हजारों क्विंटल सोयाबीन-चने से भरी ट्रालियां लेकर पहुंचे किसानों में उस समय आक्रोश व्याप्त हो गया जब कल के मुकाबले उक्त जिंसों के भाव 800 से 1000 रुपये नीचे गिरने लगे। किसानों का कहना था कि शासन की किसी योजना का लाभ तो मिल नहीं रहा उल्टे सोयाबीन-चने के भाव लगातार गिरते जा रहे हैं। किसानों ने बोली का बहिष्कार कर दिया। हालांकि मण्डी प्रशासन के अधिकारी किसानों समझाने के प्रयास शुरू किये हैं।

कल चिमनगंज मण्डी में चने देशी के भाव न्यूनतम 3200 रुपये और अधिकतम 3900 रुपये रहे थे जबकि औसत मूल्य 3775 रुपये रहा था। इसी प्रकार काबली चने के भाव 5300 रुपये बिका था जिसका न्यूनतम मूल्य 2600 रुपये रहा। आज सुबह 9 बजे मण्डी में हजारों क्विंटल सोयाबीन व चने से भरी ट्रालियां पहुंची और जिंसों की नीलामी प्रारंभ हुई।

नीलामी प्रारंभ हुए अभी 30 मिनिट भी नहीं बीते थे कि चना देशी और डालर के भाव कल के मुकाबले 800 से 1000 रुपये नीचे गिर गये। यही हालत सोयाबीन की भी रही। यह देख फसल बेचने आये किसानों में आक्रोश व्याप्त हो गया और उन्होंने नीलामी का बहिष्कार करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।

किसानों का कहना था कि शासन की तरफ से न तो भावांतर योजना का लाभ मिल रहा है और न ही समर्थन मूल्य मिल रहा है ऐसे में फसलों के लगातार गिर रहे भावों से उन्हें लागत निकलने में भी मुश्किल उत्पन्न हो रही है। गुस्साये किसानों के साथ कांग्रेस पार्टी के अलावा किसान नेता भी शामिल थे। मण्डी में किसानों के आंदोलन व आक्रोश की जानकारी मिलने के बाद मण्डी समिति के सदस्य व मण्डी अधिकारी यहां पहुंचे और गुस्साये किसानों को मनाने के प्रयास प्रारंभ किये।

6 लोगों की समिति करेगी निर्धारण
चिमनगंज मण्डी के अधिकारी जब किसानों को समझाने पहुंचे तो किसानों ने कहा कि पूर्व में शासन द्वारा प्याज और लहसुन की फसल पर भावांतर योजना का लाभ दिये जाने की घोषणा की गई थी लेकिन उक्त लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। ऐसे में चना व सोयाबीन की फसल के उचित दाम नहीं मिलने से और घाटा होगा।

इस पर मण्डी समिति के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि समिति में 6 लोगों की एक कमेटी गठित की जायेगी जो किसानों की फसल की क्वालिटी और रेट का निर्धारण करेगी। समिति सदस्यों का एकमत किसान को मानना होगा। इस प्रकार के आश्वासन के साथ ही किसानों और मण्डी अधिकारियों के बीच चर्चा जारी थी।