स्क्रिप्ट राइटिंग में कॅरियर बनाओं

विज्ञापन ग्राहकों की संतुष्टि के लिए बनाए जाते थे लेकिन आज जो विज्ञापन आ रहे हैं वे ग्राहकों के संतोष के साथ उसकी खुशी और मनोरंजन को भी महत्व दे रहे हैं। मानवीय भावनात्मक पक्षों को छूते विज्ञापन न सिर्फ देर तक याद रहते हैं बल्कि मन पर भी गहरा असर छोड़ते हैं।

जो युवा लिखने-पढऩे के साथ मानवीय संवेदनाओं को पकड़ कर अभिव्यक्त करने की क्षमता रखते हैं उनके लिए भी इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। हालांकि स्क्रिप्ट राइटिंग विश्लेषण और कल्पना क्षमता पर आधारित है, लेकिन फिर भी इसके लिए जर्नलिज्म कोर्स कर लिया जाए तो बेहतर होगा।

राइटर का काम सिर्फ जिंगल लिखना ही नहीं होता है, बल्कि और कई चीजें हैं, जो स्क्रिप्ट राइटर करता है, लेकिन शुरुआत जिंगल्स से ही होती है। एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ और मशहूर गीतकार प्रसून जोशी स्क्रिप्ट राइटिंग में जाना-माना नाम हैं। स्क्रिप्ट राइटिंग कहानियां और कविताएं लिखने से कुछ अलग होता है।

स्क्रिप्ट में लिखी गई हर बात का फिल्मांकन किया जाता है। इसमें लेखक को यह सोचकर लिखना पड़ता है कि उसके द्वारा लिखी गई।कौशल शिक्षा के माध्यम से, छात्रों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल सीखने का मौका मिल सकता है. पढ़ाई के साथ-साथ कौशल के क्षेत्र में खुद को निखारने और कोर्स के तुरंत बाद नौकरी के अवसर उपलब्ध होते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीरपोस्ट ग्रेजुएशन के बाद छात्रों के हाथ में सिर्फ डिग्री होती है और फिर नौकरी के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती है। यह इसलिए होता है क्योंकि डिग्री उन्हें विषय की सैद्धांतिक जानकारी देती है और किसी खास कौशल में उनका प्रशिक्षण या तो नहीं होता या न के बराबर होता है।

ऐसे में वे उद्योगों में काम करने के लिए तैयार नहीं माने जाते। यही कारण है कि भारतीय युवाओं का एक बड़ा हिस्सा ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद भी बेरोजगार रह जाते हैं क्योंकि वो नौकरी के लिए तैयार नहीं होते।

ऐसे में भारत में कई यूनिवर्सिटी और शिक्षण संस्थान हैं जहां से पढ़ाई के साथ-साथ कौशल के क्षेत्र में खुद को निखारने और कोर्स के तुरंत बाद नौकरी के अवसर उपलब्ध होते हैं। देश में ऐसे कई संस्थान हैं जो कौशल प्रमाणपत्र से लेकर स्नातक, परास्नातक और पीएचडी तक के कार्यक्रम प्रदान करते हैं।