हमारा हर कर्म हमारे आने वाले कल के लिए एक बीज की तरह होता है

पिता की कहानी, जिसने रमेश को बीज के जरिये संबंधों के महत्व के बारे में बताया।

रमेश अपने व्यवसाय के साथ-साथ अपनी निजी जिंदगी में भी बेहद सफल थे।

एक बार उनके एक दोस्त ने उनसे पूछा, क्या तुमने जिंदगी में कभी किसी कठिनाई का सामना किया है? वह बोले, एक दौर ऐसा भी था, जब मेरे पास खाने को दो वक्त की रोटी भी नहीं होती थी। आज से तीस साल पहले अगर तुम मुझसे मिलते, तो सोच भी नहीं सकते थे कि मैं एक दिन इस मुकाम तक पहुंचूंगा।

मेरे पिता बरेली के पास एक छोटे से गांव में किसान थे। हमारे पास जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा हुआ करता था, जिस पर हम टमाटर उगाते थे।पिता जी पूरा खेत जोतते थे और मां और मैं नालियां बनाकर एक कतार में बीज डालते जाते थे। फिर मेरे दोनों भाई उसके ऊपर खाद का मिश्रण डालते थे। खाद पड़ जाने के बाद उन नालियों को वापस मिट्टी से भर दिया जाता था।

लगातार सिंचाई करने के बाद वे बीज बड़े-बड़े टमाटर बन जाते थे। टमाटर उगाने की उस प्रक्रिया के दौरान मेरे पिता मुझे समझाया करते थे कि बेटा, तुमने देखा, कैसे ये बीज इतनी जल्दी टमाटर बन जाते हैं। फिर टमाटर की सब्जी और चटनी बनती है, जिसका हम सब मिलकर आनंद उठाते हैं।

कुछ इसी तरह से हमारे रिश्ते और हमारे संबंध भी पककर तैयार होते हैं। हमारा हरेक भाव, हमारी हरेक बात एक बीज की तरह होती है, जो समय के साथ परिपक्व होती जाती है। और हमारी अलग-अलग परिस्थितियां उन बीजों के लिए खाद की तरह काम करती हैं, उन बीजों को प्रभावित करती हैं।

पानी होता है समय।यानी आज मैं जो भी हूं, जो मेरे रिश्ते हैं, जो मेरी उपलब्धियां हैं, उनके बीज मैंने काफी पहले बोए थे। उन्हीं के परिणाम स्वरूप मेरा परिवार आज इतना खुशहाल है। और मेरा परिवार आज भी उस खेत की तरह है, जो नई फसल के लिए एकदम तैयार है। मैं आज जो भी करूंगा, वह मेरे आने वाले कल के लिए एक बीज की तरह होगा। रमेश की इस बात ने उसके दोस्त को बहुत प्रभावित किया।