हमारे गौरव:मन के मकरन्द की रचनाकार सीमा जोशी

उज्जयिनी की काव्य परम्परा में एक महिला गीतकार के रूप में जो स्वर इन दिनों तेजी से उभर कर सामने आया है वह है सीमा जोशी का। जिनके गीत – कविताओं का प्रसारण गत सप्ताह भोपाल दूरदर्शन के काव्यांजलि कार्यक्रम में हुआ तो एक बार फिर चर्चा के केन्द्र में आ गई।
मूलत: गीतकार कवियित्री सीमा जोशी मालवी और हिन्दी में काव्य रचना करती हैं। वे लिख तो तीन दशक से रही हैं लेकिन हाल के वर्षों में आकाशवाणी, भोपाल दूरदर्शन, संस्कृति विभाग, वामा साहित्य मंच इन्दौर, अ भा शब्द प्रवाह और मध्यप्रदेश लेखक संघ आदि प्रतिष्ठित मंचों पर उनकी सधी हुई गीत प्रस्तुति ने सहज ही सुधि श्रोताओं का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। बीते दिन भोपाल दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम काव्यांजलि में अपने सुमधुर गीत कविताओं से उन्होंने ऐसा समा बांधा कि दर्शक और मंचस्थ कविगण आह और वाह किए बिना नहीं रह सके।

काव्यांजलि का शुभारंभ ही उनकी रचनाओं से हुआ। निश्चित ही उनकी यह गौरवपूर्ण उपलब्धि उज्जैन और मालवा के साथ ही हिन्दी तथा मालवी के कवियों के लिए गर्व की बात है। तीन खंडों में प्रकाशित उनकी कृति “मन के मकरन्द” में हिन्दी और मालवी के गीतों के साथ ही समकालीन कविताओं को भी संकलित किया गया है। हिन्दी गीत खंड में 43 ,मालवी गीत खंड में 11 और समकालीन कविता खंड में 24 मिलाकर मन के मकरन्द में 78 गीत- कविताओं का एक सुन्दर गुलदस्ता देखने को मिलता है जिसमें हर रंग और हर मिजाज की रचनाएँ आपको पढऩे को मिल जाएगी।