2019 से पहले इन राज्यों को भी जीतना चाहेगी BJP, ये है शाह का अगला मिशन

2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज करने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी का विजयी ग्राफ ऊंचा होता जा रहा है. 1980 में ये पार्टी आज देश की सत्ता के साथ 19 राज्यों में जीत का परचम लहराते हुए मानचित्र का ‘रंग’ बदल दिया है. वहीं, बीजेपी के अनुरूप निरंतर आ रहे चुनावी नतीजों ने कांग्रेस को हाशिये पर धकेल दिया है.

हालांकि, गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जरूर एक चुनौती के रूप में उभरकर आए हैं. लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात की जीत को आसान करार दिया और अब उनका ‘मिशन 2018’ है. इस प्रोजेक्ट पर उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है.

अगले साल देश के कुल आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें चार बड़े राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ हैं. जबकि चार नॉर्थ ईस्ट के राज्य हैं, जिनमें मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम शामिल हैं.

2018 में जिन चार बड़े सूबों में चुनाव होने हैं, उनमें से तीन में फिलहाल बीजेपी की सरकार है. राजस्थान मे वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी शासन कर रही है. जबकि कर्नाटक में देश के चुनावी नक्शे से गायब होती कांग्रेस का कब्जा है. यही वजह है कि अमित शाह का यहां खास फोकस भी है.कर्नाटक दक्षिण भारत का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां बीजेपी की सबसे मजबूत पकड़ है. 2007 में पहली बार यहां पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचने का मौका मिला. इसके बाद 2008-2013 तक बीजेपी ने पूरी सरकार चलाई. हालांकि, उसे बीएस युदुरप्पा और सदानंद गौड़ा के रूप में दो मुख्यमंत्री बदलने पड़े.

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं. इनमें फिलहाल कांग्रेस के पास 122 हैं और 40-40 बीजेपी और जनता दल (सेकुलर) के पास हैं. बाकी 22 सीटें अन्य के खाते में हैं. वोट प्रतिशत की बात की जाए तो उसमें भी कांग्रेस बीजेपी से काफी आगे है. 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 41%, बीजेपी को 20%, जद(एस) को 20% और अन्य को 23% मिला था.

2013 के विधानसभा चुनाव में भले ही बीजेपी वोट शेयर और सीट के मामले में कांग्रेस से काफी पिछड़ गई हो, लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव उसके लिए बंपर बोनस की तरह आया. पार्टी ने सूबे की कुल 28 लोकसभा सीटों में से 17 पर जीत दर्ज की और मोदी लहर में उसका वोट प्रतिशत 43 पहुंच गया. हालांकि, वोट प्रतिशत के मामले में कांग्रेस उससे ज्यादा पीछे नहीं रही और उसे 41% मत मिले, लेकिन वो सिर्फ 9 लोकसभा सीटें जीत पाई.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की बात तो यहां कांग्रेस बीजेपी से काफी पीछे है, जो निवनिर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है.बीजेपी की चुनावी तैयारियों का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उसने बीएस येदुरप्पा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. दूसरी तरफ पीएम मोदी की विकास योजनाओं का झुकाव भी कर्नाटक में दिखाई दे रहा है. यहां तक कि सोमवार को गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी सीधे रात को कर्नाटक पहुंच गए. यहां वो चक्रवात ओखी से प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे. इससे पहले अक्टूबर में कर्नाटक के बीदर में पीएम ने बीदर-कलाबुर्गी के बीच नई रेलवे लाइन का उद्घाटन किया था.

वहीं गुजरात चुनाव के बीच पीएम नॉर्थ ईस्ट राज्यों का दौरा भी कर चुके हैं. मिजोरम में पावर प्रोजेक्ट समेत कई योजनाओं का उन्होंने उद्घाटन किया है. साथ ही शिलांग में भी उन्होंने विकास योजनाओं का उद्घाटन किया है.

त्रिपुरा में सीपीएम के गढ़ में ख़ुद को साबित करने की अमित शाह के सामने चुनौती है तो कांग्रेस के शासन वाले मेघालय और मिजोरम में भी उन्हें फतह पानी है. वहीं नगालैंड में बीजेपी की गठबंधन सरकार है.

ऐसे में अब ये देखना होगा कि अमित शाह का ये प्रोजेक्ट बीजेपी को 2019 से पहले किस ओर ले जाता है. साथ ही राहुल गांधी के लिए भी ये बड़ा इम्तिहान होने वाला है.

2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज करने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी का विजयी ग्राफ ऊंचा होता जा रहा है. 1980 में ये पार्टी आज देश की सत्ता के साथ 19 राज्यों में जीत का परचम लहराते हुए मानचित्र का ‘रंग’ बदल दिया है. वहीं, बीजेपी के अनुरूप निरंतर आ रहे चुनावी नतीजों ने कांग्रेस को हाशिये पर धकेल दिया है.

हालांकि, गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जरूर एक चुनौती के रूप में उभरकर आए हैं. लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात की जीत को आसान करार दिया और अब उनका ‘मिशन 2018’ है. इस प्रोजेक्ट पर उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है.

अगले साल देश के कुल आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें चार बड़े राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ हैं. जबकि चार नॉर्थ ईस्ट के राज्य हैं, जिनमें मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम शामिल हैं.

2018 में जिन चार बड़े सूबों में चुनाव होने हैं, उनमें से तीन में फिलहाल बीजेपी की सरकार है. राजस्थान मे वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी शासन कर रही है. जबकि कर्नाटक में देश के चुनावी नक्शे से गायब होती कांग्रेस का कब्जा है. यही वजह है कि अमित शाह का यहां खास फोकस भी है.

कर्नाटक दक्षिण भारत का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां बीजेपी की सबसे मजबूत पकड़ है. 2007 में पहली बार यहां पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचने का मौका मिला. इसके बाद 2008-2013 तक बीजेपी ने पूरी सरकार चलाई. हालांकि, उसे बीएस युदुरप्पा और सदानंद गौड़ा के रूप में दो मुख्यमंत्री बदलने पड़े.

कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं. इनमें फिलहाल कांग्रेस के पास 122 हैं और 40-40 बीजेपी और जनता दल (सेकुलर) के पास हैं. बाकी 22 सीटें अन्य के खाते में हैं. वोट प्रतिशत की बात की जाए तो उसमें भी कांग्रेस बीजेपी से काफी आगे है. 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 41%, बीजेपी को 20%, जद(एस) को 20% और अन्य को 23% मिला था.

2013 के विधानसभा चुनाव में भले ही बीजेपी वोट शेयर और सीट के मामले में कांग्रेस से काफी पिछड़ गई हो, लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव उसके लिए बंपर बोनस की तरह आया. पार्टी ने सूबे की कुल 28 लोकसभा सीटों में से 17 पर जीत दर्ज की और मोदी लहर में उसका वोट प्रतिशत 43 पहुंच गया. हालांकि, वोट प्रतिशत के मामले में कांग्रेस उससे ज्यादा पीछे नहीं रही और उसे 41% मत मिले, लेकिन वो सिर्फ 9 लोकसभा सीटें जीत पाई.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की बात तो यहां कांग्रेस बीजेपी से काफी पीछे है, जो निवनिर्वाचित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है.

बीजेपी की चुनावी तैयारियों का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उसने बीएस येदुरप्पा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. दूसरी तरफ पीएम मोदी की विकास योजनाओं का झुकाव भी कर्नाटक में दिखाई दे रहा है. यहां तक कि सोमवार को गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी सीधे रात को कर्नाटक पहुंच गए. यहां वो चक्रवात ओखी से प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे. इससे पहले अक्टूबर में कर्नाटक के बीदर में पीएम ने बीदर-कलाबुर्गी के बीच नई रेलवे लाइन का उद्घाटन किया था.

वहीं गुजरात चुनाव के बीच पीएम नॉर्थ ईस्ट राज्यों का दौरा भी कर चुके हैं. मिजोरम में पावर प्रोजेक्ट समेत कई योजनाओं का उन्होंने उद्घाटन किया है. साथ ही शिलांग में भी उन्होंने विकास योजनाओं का उद्घाटन किया है.

त्रिपुरा में सीपीएम के गढ़ में ख़ुद को साबित करने की अमित शाह के सामने चुनौती है तो कांग्रेस के शासन वाले मेघालय और मिजोरम में भी उन्हें फतह पानी है. वहीं नगालैंड में बीजेपी की गठबंधन सरकार है.

ऐसे में अब ये देखना होगा कि अमित शाह का ये प्रोजेक्ट बीजेपी को 2019 से पहले किस ओर ले जाता है. साथ ही राहुल गांधी के लिए भी ये बड़ा इम्तिहान होने वाला है.