सफल होने के लिए अपनाएं हनुमान जी की ये 5 बातें

आज के युग में हनुमान जी को सबसे सशक्त देवता माना जाता है। मान्यता है कि इस कलयुग में केवल मात्र वही देवता हैं जो इंसान की समस्त बाधाएं दूर कर सकते हैं। यही कारण है कि आज भी हर जगह पूरी श्रद्धा और सम्मान से हनुमान जी की पूजा की जाती है। लेकिन हमुमान जी के जीवन का अध्ययन करीब से किया जाए तो पता चलता है कि उनमें कार्य कुशलता के साथ ही गजब की प्रबंधन क्षमता भी थी।

हनुमान जी तो गुणों की खान हैं। उनके जैसा कोई नहीं हो सकता। लेकिन कोई उनके जीवन पांच बातें अपने जीवन में उतार लेता है तो उसे हर काम में सफलता मिलना निश्चित है।

अपनाएं हनुमान जी की ये पांच बातें

1-कॉम्युनिकेशन स्किल (संवाद कौशल)
बहुत से लोग सफल होते होते इसलिए रह जाते हैं क्योंकि उनके पास संवाद कौशल नहीं होता। संवाद कौशल के बारे में हनुमान जी के जीवन का एक अनोखा उदाहरण है- कहते हैं सीता जी से हनुमान जी जब पहली बार ‘अशोक वाटिका’ तो वह काफी देर तक यह सोचते रहे कि सीता जी से बात कैसे की जाए। कहीं उनका बानर रूप देखकर वह डर तो नहीं जाएंगी? उनकी बात पर सीता जी को भरोसा कैसे होगा? लेकिन हनुमान जी ने अपनी अद्भुत काम्युनिकेशन स्किल से उन्हें यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि वे राम के ही दूत हैं।

2- विनम्रता : हनुमान जी को जब लंका जाने का टास्क दिया गया तो समुद्र लांघते वक्त बीच रास्ते में सुरसा नाम की एक राक्षसी उन्हें मिली। यहां पर हनुमान पहले से तो सुरसा से टकराए और अपना शरीर सुरसा के मुंह से दोगुना करते गए। लेकिन जब उन्हें समझ आया कि ऐसे में उनका समय बर्बाद हो रहा है तो उन्हें सुरसा से विनम्रता पूर्वक आग्रह कि या उन्हें अभी जाने दिया जाए। हनुमान जी की विनम्रता से सुरसा प्रसन्न हुई और उन्हें लंका की ओर जाने दिया।

3- संयमित जीवन: हनुमान जी ने अपने जीवन में कभी भी संयम नहीं तोड़ा। कहा जाता है कि वह भगवान राम की सेवा के लिए वह आजीवन ब्रह्मचारी रहे। खान-पान में सावधानी बरतने और संयमित दिनचर्या के साथ रहने से बीमारी जल्दी पास नहीं आतीं। इसलिए सफलता के लिए जीवन में थोड़ी संयम रखना जरूरी है।

4- समाधान के लिए पहाड़ उठाया
हनुमान जी के पास हर समस्या का समाधान होता है। वह कभी भी किसी काम को पूरा किए बिना वापस नहीं होते। रामायण में एक प्रसंग है कि रावण की सेना से युद्ध के दौरान लक्ष्मण जब मुर्छित हो गए तो वैद्य ने बताया सुमेर पर्वत में संजीवनी नाम की दवा है। हनुमान जी जब उस पहाड़ पर पहुंचे तो वह दवा को पहचान नहीं सके तो उन्होंने पूरा पहाड़ उठाकर ही लंका पहुंचा दिया ताकि पहाड़ में मौजूद दवाई मिल सके।

5- कार्य के प्रति समर्पण : हनुमान जी को जो भी कार्य दिया जाता था उसके लिए वह पूरी तरह से खुद को समर्पित कर देते थे। कहते कि जब हनुमान जी सुग्रीव की सेवा में थे भगवान राम सीता की खोज वहां पहुंचे। इस सुग्रीव ने हनुमान जी को भेजा कि देखो कोई दुश्मन तो नहीं आ रहा। इसके बाद हनुमान जी ने वेष बदलकर मिलने पहुंचे। बताते हैं कि हनुमान जी भगवान राम यहां कुश्ती लड़ी और जब हार गए तब उन्हें लगा ये कोई आम इंसान नहीं हैं। इसके वह भगवान से सारा प्रसंग पूछा और फिर सुग्रीव के पास ले जाकर उनकी दोस्ती कराई।