चिंतन

पूरे जीवन में इन किस्म के लोगों से जरूर मिलेंगे आप

स्वभाव और आचार:- इन्हीं लोगों में से कुछ लोग बहुत खास होते हैं जो हमेशा के लिए हमारी जिन्दगी में शामिल हो जाते हैं। कुछ हैलो-हाय का संबंध रखते हैं तो कुछ ऐसे होते हैं जिनके विषय में हम ये सोचते हैं कि ‘भगवान करे दोबारा कभी इसकी शक्ल ना दिखे’। जिसका कारण बनता है उनका स्वभाव, बोलने का तरीका और ...

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एक-दूसरे को समझना क्या मुश्किल है?

दफ्तर या कार्यस्थल पर अक्सर ही लोग टकराव की स्थिति में खुद को पाते हैं। उन्हें लगता है कि वे सही हैं लेकिन उनकी बात को दूसरे समझ नहीं पा रहे हैं। इस तरह का टकराव पति-पत्नी के बीच रिश्तों में भी आता है और माता-पिता के साथ भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। इस टकराव को टालने के ...

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लक्ष्य जितना महान होता है जीवन में उतनी पूर्णता आती है

मि ट्टी कुम्हार से बोली, ‘मुझे पात्र बना दो। कुम्हार ने कहा, ‘क्यों/ मिट्टी बोली, ‘ताकि मुझमें पानी रह सके और लोग अपनी प्यास बुझा सकें। इससे मेरा जीवन सार्थक होगा।Ó प्रत्येक मनुष्य के मन में भी ऐसे ही सार्थक जीवन की आकांक्षा होती है। यह गलत भी नहीं है।

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जोर से भजन गाना नहीं, ईश्वर भाव में प्रतिष्ठित होना है साधना

‘ईश्वर’ शब्द के अनेक अर्थ हो सकते हैं, पर शब्द का साधारण अर्थ है नियंता। जो इस विश्वकल्पना का नियंत्रण करते हैं, वे हैं ईश्वर। सब बंधनों से मुक्त पुरुष को भी दार्शनिक शब्दावली में ईश्वर कहा जाता है। हालांकि साधक की दृष्टि से देखें तो ईश्वर सगुण ब्रह्म या भगवान को छोड़ कर कुछ भी नहीं है।

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ईश्वर के सच्चे रूप हैं माता-पिता, कौन चुका पाया उनका ऋण

एक महानगर में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था। गृहस्वामी शर्माजी, उनकी सुंदर-सुसंस्कृत पत्नी, दो कॉलेज जाते बच्चे और शर्माजी के बूढ़े माता-पिता, जिनकी उम्र 80 को पार कर रही थी। शर्माजी दिन-रात पुत्र-पुत्री और पत्नी की इच्छाओं को पूरा करने में जुटे रहते।

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