स्वच्छ भारत, साक्षर भारत – मंथन

‘स्वच्छ भारत अभियान’ एक राष्ट्रीय अभियान है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्वच्छता मुहिम है जो कि भारत सरकार द्वारा चलाया गया है। सम्पूर्ण भारतवर्ष में – स्कूलों में, महाविद्यालयों में, कार्यालयों में – बच्चे, बड़े क्रमचारी, कलाकार, राजनीतज्ञादि बड़े ही उत्साहित होकर इस स्वच्छता अभियान में भाग ले रहे हैं । यह अभियान आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री ‘श्री नरेन्द्र मोदी जी’ द्वारा ‘राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी’ के 145वें जन्मतिथी यानि 2 अक्तूबर 2014 को नइ दिल्ली के राजघाट में आरंभ किया गया था। यह इस उद्देश्य से आरंभ किया गया कि लोग इस बात को समझें कि देश को स्वच्छ रखना भारत के प्रत्येक नागरिक का दायित्त्व है । ‘दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान’ का सामाजिक प्रकल्प मंथन – ‘संपूर्ण विकास केन्द्र’ भी इस राष्ट्रीय अभियान में प्रत्येक वर्ष बड़े ही सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है। यह प्रकल्प अपने देश भर में फैले 18 सम्पूर्ण विकास केन्द्रों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के कस्बों, बस्तियों तथा ग्रामीण इलाकों में लोगों को स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करता रहा है ।

इस वर्ष भी मंथन प्रकल्प के तहत 30 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक, दिल्ली के शकूरपुर, मंगोलपुरी, द्वारका, विकासपुरी, बादली आदि केन्द्रों पर स्वच्छता कार्य को सम्पादित किया गया। मंथन – ‘संपूर्ण विकास केन्द्र’ के सभी विद्यार्थी, शिक्षक व स्वयंसेवकों द्वारा ‘स्वच्छता की महत्ता’ को प्रकाशित करते हुए स्वच्छता – जागृति रैलियाँ निकाली गयीं। बच्चों ने भी विविध पोस्टर, क्रियाकलापों व नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जागरुकता फैलाने का सफल प्रयास किया । इसी क्रम में कुछ केन्द्रों ने अपने केन्द्र, विद्यालय और आसपास के स्थलों को स्वच्छ किया।

अन्य केन्द्रों पर निबंध व चित्रकारी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।  लोगों ने भी दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के मंथन प्रकल्प से जुड़े बच्चों, शिक्षकों व स्वयंसेवकों के इस प्रयास की सराहना की। कुछ लोगों ने मंथन प्रकल्प में अपनी भागीदारी भी दिखाई। अनन्तर उन लोगों ने स्वच्छता कार्य से संबंधित स्वकीय अनुभवों को भी सांझा किया। यह अभियान मुख्य रूप से लोगों में व्यवहारिक – परिवर्तन व स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए चलाया गया है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता तंत्र को ठोस बनाना व पर्यावरण – संरक्षण ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।