Hartalika Teej 2019: जानें हरतालिका तीज की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सनातन संस्कृति में विशेष तिथियों का खास महत्व है और पर्वों की छटा तो देखते ही बनती है। भारतवर्ष में संस्कृति के अनुसार त्यौहारों को मनाने की परंपरा है और देश के विभिन्न हिस्सों में इनको अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। वर्ष की एक ऐसी ही विशेष तिथि है हरतालिका तीज। इस तिथि को भाद्रपद यानी भादो मास की शुक्‍ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

कब है हरतालिका तीज

हरतालिका तीज हर साल गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले आती है। इस बार एक सितंबर को हरताल‍िका तीज मनाने की बात कही जा रही है, लेकिन इसको एक तारीख को मनाने को लेकर पंडितों में मतभेद नजर आ रहे हैं।

कुछ जानकार व्रत के लिए एक सितंबर को उचित समय बता रहे हैं। उनका कहना है कि उस एक तारीख को दिन भर तृतीया रहेगी और यह भी तर्क दिया जा रहा है कि हरतालिका तीज का व्रत हस्‍त नक्षत्र में किया जाता है और यह नक्षत्र एक सितंबर को है। लेकिन कुछ जानकार व्रत के लिए दो तारीख को उचित बता रहे है। उनका कहना है कि चतुर्थी युक्‍त तृतीया तिथि को सौभाग्‍यवर्द्धक माना जाता है इसलिए हस्त नक्षत्र के उदयातिथि योग में दो सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रखना उचित होगा।

हरतालिका तीज के शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि का प्रारंभ एक सितंबर 2019 को सुबह 08 बजकर 27 मिनट से होगा और इसका समापन दो सितंबर 2019 को सुबह 4 बजकर 57 मिनट पर होगा। एक सितंबर को व्रत करने वालों के लिए पूजा मुहूर्त सुबह 08 बजकर 27 मिनट से 08 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। प्रदोषकाल में पूजा का मुहूर्त शाम 6 बजकर 39 मिनट से 8 बजकर 56 मिनट तक दो घंटे 17 मिनट का है।दो सितंबर को व्रत रखनेवालों के लिए पूजा का मुहूर्त सूर्योदय से 08 बजकर 58 मिनट तक है।

हरतालिका तीज की पूजन विधि

हरतालिका तीज की पूजा प्रदोषकाल में करने का विधान है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा करती है। शाम के समय स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ कपड़े पहने और सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद गीली मिट्टी लेकर शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमाओं का निर्माण करें।

मां पार्वती को सुहाग की सामग्री पंचामृत, फल-फूल, सूखे मेवे, वस्त्र समर्पित करें। शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करने के बाद हरतालिका तीज की कथा सुने। कथा संपन्न होने पर गणेश जी इसके बाद शिवजी व माता पार्वती की आरती उतारें। ककड़ी और हल्‍वे का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद ककड़ी का प्रसाद ग्रहण करें। सारी पूजा सामग्री पूजा संपन्न होने के बाद किसी सुहागिन महिला को दान में दे देवें।