भक्त के जीवन में विपरीत परिस्थितियाँ उसे निखारने के लिए आती है

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में मासिक भंडारे कार्यक्रम का आयोजन किया गया! जिसमें सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याओं ने भक्त श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि सुव्यवस्थित समाज की स्थापना करनी है तो आज मानव को स्वयं से जुड़ना होगा, भक्ति मार्ग का चयन करना होगा| इतिहास में ऐसे असंख्य भक्त हुए है जिन्होंने समाज कल्याण हेतु अपने जीवन को अर्पित किया है| ऐसे शिष्यों ने ईश्वर से केवल भक्ति, श्रद्धा, प्रेम एवं ज्ञान मार्ग माँगा| संसार में रहते हुए भी ईश्वर से ईश्वर की ही गुहार की| सृष्टि में सबसे उत्तम एवं श्रेष्ठतम मार्ग – भक्ति मार्ग है| जो जीव को परम शांति प्रदान करता है| प्रलाह्द जिसने अपने पिता के विरुद्ध जा कर श्री हरी से प्रेम किया, भगवान् का मार्ग चुना! और इसी भक्ति से उसे प्रभु भी मिले, अंत में पिता का प्यार भी मिला, और वह अपने पिता के कल्याण का कारण भी बना! यह तभी संभव हुआ जब भक्त प्रह्लाद ने सत्य मार्ग का चयन किया! हमारे इतिहास में ऐसे असंख्य उदहारण आते है जिसमें यह स्पष्ट है कि जिन्होंने भी अपने जीवन में भक्ति की परिकाष्ठा को प्राप्त किया, उन्होंने अपने जीवन में अनेकों कठिनाईयों का सामना करते हुए सत्य के मार्ग में हमेशा कदम आगे बढ़ाएं! वह परेशानियों को देख कर विचलित नहीं हुए अपितु भक्ति मार्ग की यात्रा में बैठे रहे, मार्ग को छोड़ कर नहीं गए! इतिहास में आज उन्हीं का नाम वर्णित है जिन्होंने अपने गुरु की आज्ञाओं का पालम किया, गुरु के वचनों पर विश्वास कर, गुरु के आदर्शों पर चल कर अपने जीवन को संतुलित बनाया एवं अपने जीवन में कल्याण को प्राप्त किया! और यदि ऐसे शिष्यों के जीवन में कोई विपदा या मुसीबत आई तो वह उसे निखारने के लिए आई|

जिस प्रकार से सोना आग की भट्टी में तप कर ही कुंदन बनता है ठीक वैसे ही भक्ति की चमक विपदाओं के आने पर ही देदीप्यमान होती है। और जो भीतर की शक्ति को नहीं जनता, वही इस मार्ग से विचलित होकर एक दिन इस मार्ग को छोड़ देता है! आज समाज में अनेकों किताबे है जो विपरीत परिस्थितियों में साहस न छोड़ने की प्रेरणा देती है पर उनमें लिखे शब्द हमारी बुद्धि तक ही सिमित रहते है, वह हमारे कर्म में स्थान नहीं ले पाते| जिस आत्मविश्वास की खोज हम कर रहे हैं वह आत्मा को जानने पर ही प्राप्त होगा। कहा भी गया है कि पृथ्वी पर सशक्त हथियार आत्म जाग्रति है। सफलता हासिल करने का केवलमात्र आधार ब्रह्मज्ञान है, जो मानव को सही दिशा प्रदान कर उसे सशक्त बनाता है एवं जीवन युद्ध लड़ते हुए भक्ति की पराकाष्टा को प्रदान करता है|