Movie Review:Fantastic Beasts 2

अमेरिकी जादू मंत्रालय, मगलुओं, ऑरर्स, चुड़ैलों और जादू सीखते छात्रों की दुनिया एक बार फिर आपसे रूबरू है। जी हां, लेखिका जे के रोलिंग की तिलिस्मी दुनिया। ‘फैन्टैस्टिक बीस्ट्स: दि क्राइम्स ऑफ ग्रिन्डेलवाल्ड’ के रूप में। यह फिल्म हैरी पॉटर सीरीज की फिल्मों के प्रीक्वल का दूसरा भाग है। पिछले भाग ‘फैन्टैस्टिक बीस्ट्स एंड वेयर टू फाइंड देम’ को काफी पसंद किया गया था। पर इस सीरीज का दूसरा भाग उतना मनोरंजक नहीं बन पाया है, जितनी उम्मीद की जा रही थी।

कहानी शुरू होती है फिल्म के विलेन यानी गैलर्ट ग्रिन्डेलवाल्ड (जॉनी डेप) के जादू मंत्रालय अधिकारियों की कैद से भाग निकलने से। ग्रिन्डेलवाल्ड को पिछली फिल्म में न्यूट (एडी रेडमेन) यानी जादू स्कूल के प्रोफेसर डमबल्डोर के विश्वासपात्र छात्र और मैजिजूलॉजिस्ट यानी (विचित्र जादुई जीवों में विशेषज्ञता रखने वाला छात्र) ने कैद कर लिया था।

इस बार भी कैद से भागे ग्रिन्डेलवाल्ड के मंसूबे खतरनाक हैं। मंत्रालय इस बात को भांपते हुए उसे काबू में करने के उपायों में लग जाता है। उधर न्यूट के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है जिससे वजह निजात पाना चाहता है। न्यूट का भाई थीसियस (कैलम टर्नर), टीना (कैथरीन वॉटरस्टन) और टीना की बहन क्वीनी (एलीसन स्यूडॉल) ऑरर (बुरे जादूगरों को वश में करने की क्षमता वाले जादूगर) हैं। इस बीच एक खबर आती है कि गैलर्ट ग्रिन्डेलवाल्ड को एक नौजवान की तलाश है जो उसे उसके मकसद में मदद करेगा। इसके बाद कई सारे लोग इस नौजवान की तलाश में लग जाते हैं।

कहानी कई जटिल मोड़ों से गुजरती है, कई खुलासे करती है और इस बात की संभावनाओं को बढ़ाती है कि इसके अभी कई और भाग भी बनेंगे। पर इतने सालों बाद इसमें जो पैनापन, जो तिलिस्म होना चाहिए था, वह नदारद नजर आता है। कलाकारों ने अभिनय तो अच्छा किया है, पर कहानी और स्क्रीनप्ले ही उनकी मदद करता नजर नहीं आता। न्यूट के दोस्त की भूमिका में जेकब कोवाल्स्की अपनी छाप छोड़ जाते हैं। ‘मैंने आज तक बाल्टी में यात्रा नहीं की’ जैसे उनके संवाद दर्शकों को गुदगुदाते हैं। उनकी भाव भंगिमाएं, बोलने का अंदाज और अंदाज सब खास लगता है। न्यूट की भूमिका के साथ एडी रेडमेन ने भी न्याय किया है। जॉनी डेप विलेन की भूमिका में प्रभावित करते हैं पर यह किरदार जरा और डराता, तो फिल्म को और मजबूती मिल सकती थी। फिल्म का वायलिन आधारित पाश्र्व संगीत अच्छा है और फिल्म की गति के अनुरूप है।

फिल्म की हिंदी डबिंग कमजोर है। इन फिल्मों में जादू न जानने वाले शख्स के लिए ‘मगलू’ शब्द का इस्तेमाल होता आया है। पर ‘फैन्टैस्टिक बीस्ट्स: दि क्राइम्स ऑफ ग्रिन्डेलवाल्ड’ में जब आप मगलू की जगह ‘अनजादू’ शब्द सुनते हैं, तो अजीब सी खीझ होती है। इस किस्म की खीझ फिल्म के कई और शब्द भी पैदा करते हैं। देखा जाए तो हैरी पॉटर शृंखला की फिल्मों की डबिंग ठीकठाक हुई थी। पर इस बार मामला कुछ जमा नहीं। और ये पिंकी, बंटी, टीना जैसे नाम कौन सुझाता है भाई? नाम का किरदार से कोई मेल भी तो होना चाहिए। जो भी ऐसा करता है, उसे जनता माफ नहीं करेगी!