शांतिपूर्ण समाज स्थापित करने हेतु जागरूकता रैली का आयोजन

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के युवा ब्रह्मज्ञानी शिष्यों ने जन-कल्याण की भावना हेतु पूर्वी दिल्ली में रैली निकाल कर आत्म जाग्रति का दिया सन्देश! जिसमें अध्यात्मिक संदेशों व ग्रंथों के गुंढतम रहस्यों का सरलीकरण करते हुए प्रत्येक युवा नें रैली में बढचढ कर भाग लिया! जिसमें समाज को यही सन्देश दिया गया कि जिस ब्रह्मशक्ति से मनुष्य बोलता व संवाद करता है, जो समस्त ऐन्द्रिक अनुभवों का कारण है, वह ब्रह्मशक्ति प्रत्यक्ष रूप से अनुभव गमय है अर्थात उस ईश्वर को देखा जा सकता है!

वही मानव का चैतन्य स्वरुप है, किंतु उस दिव्य-स्वरुप से संबंध स्थापित करने के लिए आवश्यक है मानव के जीवन में एक तत्व ज्ञानी गुरु का होना! तथा यह रैली संस्थान द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक प्रकल्पों के बारे में अवगत करवाने का माध्यम भी बनी। जिसमें समस्त जन समूह को संस्थान के स्वयंसेवकों ने नाटिका के माध्यम से शिक्षा का महत्व बताया एवं बच्चों, महिलाओं और समाज के अन्य सभी वर्गों को सांसारिक ज्ञान के साथ-साथ सनातन ज्ञान द्वारा भी शिक्षित करने के लिए प्रेरित किया। इस नाटक की कहानी ने स्पष्ट रूप से इस विचार को व्यक्त किया कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति जो आत्म ज्ञान द्वारा जागृत हो चुका है वे ही शांतिपूर्ण समाज के गठन को उन्न्ति प्रदान कर सकता है।

युवा पीढ़ी को जागरूक करने हेतु रैली में यह भी सन्देश दिया गया कि युवा हमारे देश की रीढ़ की हड्डी है और यदि रीढ़ की हड्डी ही गल जाए तो शारीर का कोई वजूद नहीं रहता है! आंतकवाद, गरीबी, बेरोजगारी जैसी समस्याओं का अंत करना है तो युवा को पहले भीतर से जागृत होना होगा! तभी समाज में परिवर्तन संभव है! युवा बदलेगा तो देश बदलेगा! युवा के अंदर अपार क्षमता है बस उसे दिशा देने की आवश्यकता है!