विश्व शांति स्थापित करने हेतु हजारों युवा तैयार – साध्वी आस्था भारती

पीतमपुरा, दिल्ली में दिनांक 26 नवम्बर से 02 दिसम्बर, 2017 तक ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ का अद्भुत, भव्य व विशाल आयोजन किया गया| इस अवसर पर संस्थान के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए साध्वी आस्था भारती जी ने कहा कि पंजाब में सर्व श्री आशुतोष जी महाराज ने उस समय संस्थान की शुरुआत की जब चारों और आतंकवाद की घोर कालिमा थी। उस समय चंद लोगों को लेकर शुरु हुआ यह संस्थान आज विश्व स्तरीय ख्याति प्राप्त कर चुका है जिसके करोड़ों की संख्या में अनुयाई हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का उद्देश्य धर्म को व्यवसाय बनाना नहीं बल्कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से धर्म को जन-जन में प्रचारित करना है क्योंकि धर्म प्रदर्शन नहीं अपितु दर्शन का विषय है। साध्वी जी ने बताया कि संस्थान में हजारों युवा अपना सब कुछ त्याग कर केवल समाज कल्याण हेतु कार्यरत हैं जो कि साधन संपन्न परिवारों के शिक्षित उजाले हैं। यह सभी ब्रह्मज्ञान की मशाल लेकर विश्व शांति के संकल्प को सार्थक करने हेतु सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के मार्ग दर्शन में सेवा कर रहे हैं।

वर्तमान समाज में अशांति का मूल कारण मानव मन की अशांति है और इस मन को शांत करने हेतु मानव को ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है। जब मानव सहज आनंद में आ जाएगा तभी समाज, राष्ट्र व विश्व शांति स्थापित हो सकती है। विश्व शांति की ध्वज लिए संस्थान आज आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्रा में पूर्णतः कार्यरत है। संस्थान द्वारा भ्रूण हत्या, नशा, अश्लीलता, पर्यावरण संरक्षण, गौ वध, युवाओं में नैतिक व चारित्रिक हनन जैसे मुद्दों पर गंभीरता से कार्य कर समाधान प्रस्तुत किया जा रहा है। संस्थान ने अंतरक्रांति कार्यक्रम तहत देश की  जेलों में आध्यात्मिक विचारों व ब्रह्मज्ञान के माध्यम से कैदियों में आमूल परिवर्तन कर दिखलाया है। केन्द्रीय कारागार तिहाड़ इसकी एक प्रत्यक्ष उदाहरण है।

इसके अलावा अंतर्दृष्टि कार्यक्रम के अधीन समाज में तिरस्कृत व लाचारा दृष्टिहीन लोगों को मोमबत्ती व साबुन बनाने का व्यवसाय सिखा कर उनको अपने पैरों पर खड़ा किया गया है। देश की युवा शक्ति को नैतिक व चारित्रिक स्तर पर सुदृढ़ करने हेतु अनेकों कार्यशालायें लगाई जा रही हैं जिसमें युवाओं को नशों से दूर समाज के सभ्य नागरिक बनाने हेतु जागरुक किया जा रहा है। संस्थान द्वारा अनेकों आध्यात्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में चेतना का संचार किया जा रहा है जो अपने आप में अद्वितीय मिसाल है। आध्यात्मिक व सामाजिक तथ्यों से परिपूर्ण इस विलक्षण व रोचक कथा को श्रवण कर भक्तगण आनंद विभोर हो उठे। कथा के समापन पर पूर्णाहुति व हवन यज्ञ का भी अयोजन किया गया।