परिस्थितियां चाहे जितनी भी मुश्किल क्यों न हो, कभी न छोड़ें धैर्य का साथ

एक समय की बात है। महात्मा बुद्ध एक सभा में बिना कुछ बोले ही वहां से चले गए। उस दिन महात्मा बुद्ध की सभा में काफी लोग उन्हें सुनने आए थे। इसके बाद अगले दिन कुछ लोग ही उन्हें सुनने आए और फिर तीसरे दिन प्रवचन सुनने के लिए बहुत ही कम लोग आए।अंतिम दिन जब महात्मा बुद्ध आए तो उन्होंने इधर उधर देखा और देखा कि एक शख्स है जो रोज प्रवचन सुनने के लिए आता है।

उन्होंने देखा कि जब सभी लोग चले गए तब भी वह शख्स उनके प्रवचन को सुनने के लिए वहां खड़ा रहा। यह देखने पर महात्मा बुद्ध ने उससे पूछा कि तुम ही अकेले हो जो पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक यहां मौजूद रहे। ऐसा क्यों।

आखिर तुम प्रवचन सुनने के लिए रोज इंतजार में क्यों खड़ें रहे। महात्मा बुद्ध के इस सवाल पर शख्स ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा था कि आप यहां आकर प्रवचन जरूर देंगे। इसी वजह से मैं धैर्य पूर्वक यहां खड़ा आपके प्रवचन का इंतजार करता रहा।