Monday, May 16, 2022
Homeउज्जैन एक्टिविटीअक्षरविश्व -AVNEWS का पैनल डिस्कशन: Women YOUTH ICON ने यंग जनरेशन...

अक्षरविश्व -AVNEWS का पैनल डिस्कशन: Women YOUTH ICON ने यंग जनरेशन के लिए दिए Tips….

अक्षरविश्व -AVNEWS का पैनल डिस्कशन : उज्जैन में अलग-अलग प्रोफेशन से जुड़ी प्रभावशाली वर्किंग वूमन ने शेयर किए अपने एक्सपीरियेंस….

 Women YOUTH ICON ने यंग जनरेशन के लिए दिए टिप्स

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अक्षर विश्व द्वारा पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसमें अपने काम के जरिए शहर में अपनी अलग पहचान बनानेवाली 10 प्रभावशाली महिलाओं को आमंत्रित किया गया था। इनमें कोई डॉक्टर, कोई सीए, कोई लेक्चरर तो कोई एंटरप्रेन्योर, उज्जैन शहर के हर फील्ड की एक्सपर्ट शामिल हुई।

DSC3441 1

3 घंटे चले इस डिस्कशन में उज्जैन की यूथ आईकॉन ने कई तरह के टॉपिक पर चर्चा की जैसे अपने करियर में आए चैलेंज और प्रॉब्लम्स, वर्क लाइफ और फैमिली लाइफ में बैलेंस कैसे बनाएं इसके साथ ही युवाओं के लिए इंपोर्टेंट टिप्स भी दिए जो उनके करियर के लिए बेहद मोटिवटिंग और यूजफ़ुल भी रहेंगे।

हर्षिता धनवानी डायरेक्टर, किड्डू प्ले स्कूल…..स्ट्रगल सभी की लाइफ में होता है कम या ज्यादा डिपेंड करता है। मेरी फैमिली नहीं चाहती थी कि मैं पढ़ाई करूं, मैंने ग्रेज्यूएशन किया फिर मेरी शादी उज्जैन में हो गई।

शादी के बाद मेरे फादर इन लॉ ने पढ़ाई और कॅरियर बनाने में मुझे पूरा सपोर्ट किया। एक महिला यदि चाहे तो अपने प्यार और केयर से पूरे परिवार को अपना बना सकती है।

मेरी बेटी बहुत छोटी थी तब मैंने अपना एमबीए पूरा किया, धीरे-धीरे आगे बढ़ती गई और बहुत सारे कोर्सेज किये। मैं अपने देश के युवाओं के लिए बहुत ही खुश हूं कि आज जो हमें 15-20 साल बाद मिल रहा है उन्हें वे सभी चीजें अभी से पता है। महिलाएं पुरुषों से अपनी तुलना न करें। आप स्वयं में ही पूर्ण और शक्तिशाली हैं।

डॉ. अर्चना बापना लेक्चरर हिंदी….8वीं क्लास में मेरिट में आने के बाद मेरी आगे भी पढ़ाई करने की बहुत इच्छा थी लेकिन उस समय लड़कियां आगे पढ़ें इसे लेकर लोगों में इतनी जागरुकता नहीं थी। आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल हमारे घर से 5 किलोमीटर दूर दूसरे शहर में था। परिवार का विश्वास जीतकर मैंने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।

एमए करने के बाद मेरी शादी हो गई और मैं उज्जैन आ गई। जब मैंने जॉब करने की इच्छा घर वालों के सामने रखी तब मेरा साथ मेरे फादर इन लॉ ने दिया। ट्विंस बच्चे होने के बाद मैंने मेरी पीएचडी कंप्लीट की और फिर कॉलेज में लेक्चरर बनी। यदि आपको फैमिली का सपोर्ट है तो आप लाइफ के किसी भी चैलेंज को फेस कर लेंगे।

कोमल हरियानी चार्टर्ड अकाउंटैंट….मेरी फैमिली चाहती थी कि मैं ग्रेजुएशन करके सेटल हो जाऊं। सीए बनना कोई आसान काम नहीं था। मुझे कई बार असफलता का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने हार नहीं मानी, पढ़ाई करती गई और सीए बन गई। 7 से 8 साल की प्रैक्टिस के बाद आज मैं एक बैंक में जॉब कर रही हूं।

डॉ. खुशबू पांचाल कथक नृत्यांगना…...मैंने मात्र ढाई वर्ष से नृत्य सीखना शुरू कर दिया था और पिछले कई वर्षों में देश और विदेश में प्रस्तुतियां दी है। लेकिन जब बात नृत्य में अपना कॅरियर बनाने की आई तो परिवारवाले इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। सभी को यह लगता था कि इंजीनियर डॉक्टर या सीए बनो तो कोई बात है। डांस सीखकर क्या करोगी।

लेकिन मेरी मम्मी ने मुझे पूरा सपोर्ट किया। मैंने डांस में पीजी करने के बाद पीएचडी भी की और आज मैं अपने इंस्टीट्यूट में शहर की बच्चियों को कथक सीखा रही हूं। नारी अपने आपमें संपूर्ण है वह चाहे तो अपने दम पर कुछ भी कर सकती हैं।

श्रेया राठौर फूड ब्लॉगर….17 साल की उम्र में जब मैं ग्रेजुएशन कर रही थी उसके साथ ही मैंने पहला जॉब शुरू किया। फूड ब्लॉगिंग के जरिए उज्जैन शहर को नई पहचान दिलाना चाहती थी। मैं कहीं बाहर जाकर नहीं अपने शहर में रहकर ही कुछ करना चाहती थी। महाशिवरात्रि के दौरान जब मेरा वीडियो उज्जैन शहर के हजारों लोगों के स्टेटस पर था। वो पल मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी और गर्व का था।

कीर्ति चंदनानी कैफे ऑनर…..मेरा सबसे पहला फोकस यही था कि मुझे उज्जैन में ही कुछ स्टार्ट करना है। स्टूडेंट्स पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी क्रिएटिविटी और टाइम को यूज करने के लिए अपने शहर से बाहर जाकर कुछ करते हैं, लेकिन मुझे अपने शहर में ही रहकर अपनी एक अलग पहचान बनानी थी।

मैं एक जॉइंट फैमिली से बिलांग करती हूं। अपना कैफ़े स्टार्ट करने के लिए मेरे सामने सबसे बड़ा चैलेंज था, घर में सभी की परमिशन लेना। मैंने सिर्फ अपने पेरेंट्स को बताकर कैफे स्टार्ट किया। इसके बाद मेरे परिवार के लोगों ने तारीफ सुनी तो उन्हें गर्व का अहसास हुआ।

डॉ. नम्रता सामरिया फिजियोथेरेपिस्ट….मैं ऐसी फैमिली से हूं, जहां पढ़ाई को काफी इंपॉर्टेंस दी जाती थी। लेकिन मुझे पढऩा पसंद नहीं था। मैं पढ़ाई से हमेशा दूरी भागती थी। 12जी होने के बाद मैंने फिजियोथैरेपी में एडमिशन लिया। क्योंकि मुझे एक्सरसाइज, वर्कआउट करना बहुत पसंद था। शादी होने के बाद मैंने इंदौर में बॉम्बे हॉस्पिटल ज्वाइन किया, जिसमें मेरे फादर इन लॉ ने काफी सपोर्ट किया।

मैंने डाइट-न्यूट्रीशन और सॉयकोलॉजी का भी कोर्स किया। सबसे बड़ा मेरी लाइफ का चैलेंज था जब मेरा इंदौर का 15 साल का सेट कैरियर छोड़कर मुझे उज्जैन शिफ्ट होना पड़ा।

डॉ. अभिलाषा मलिक डेंटल सर्जन….मेरा जन्म एक ऐसी फैमिली में हुआ जहां बस लड़कियों की शादी के बारे में ही सोचा जाता था। लेकिन मेरी मम्मी के विश्वास से मैं डॉक्टर बनी। शादी के बाद मैंने अपना क्लीनिक सेट किया। मेरे सास-ससुर मेरी बेटी को संभालते थे तब कहीं मैं क्लीनिक जाकर पेशेंट को देख पाती थी।

मैंने उन्हें जितना प्यार और रेस्पेक्ट दिया बदले में मुझे उससे कहीं ज्यादा मिला। इस तरह मैंने अपनी वर्क और फैमिली लाइफ को बैलेंस किया। अब मेरे सामने चैलेंज था प्रेगनेंसी में मेरे बड़े हुए वेट का, जिसके कारण मैं डिप्रेशन में जाने लगी थी। लेकिन फिर मैंने एक्सरसाइज और डाइट कंट्रोल शुरू किया और २३ किलो वजन कम कर लिया।

पूजा तल्लेरा डायरेक्टर, इंफिटीनिटी एनर्जी सॉल्यूशन….12वीं पास करने के बाद मेरी बहुत इच्छा थी कि मुझे जलगांव के बाहर पढऩे जाना है लेकिन तब का समय बहुत अलग था। लड़कियों को शहर से बाहर जाकर पढ़ाई करना बहुत बड़ी बात होती थी। इसके लिए अपनी फैमिली को मनाने में मुझे 3 महीने लगे फिर मैंने एमआईटी पुणे से बीई किया।

शादी के बाद सीएफए पूरा किया। फिर मुझे सोलर प्लांट लगाने का विचार आया। मैंने अपनी कंपनी शुरू की और एमपी का पहला रूफटॉप सोलर प्लांट मेरे घर पर इंस्टॉल किया। मेरी लाइफ में बहुत सी मुश्किलें आई। मैंने उनका दृढ़ता से सामना किया। मैंने नए-नए ऑप्शन ढूंढे और उनमें अपना कॅरियर बनाया।

वंदना धामानी योगा इंस्ट्रक्टर…मेरी शादी एक जॉइंट फैमिली में हुई थी जहां कुछ करने का सोचना ही सबसे बड़ा चैलेंज था। जब मैंने मेरे मन की बात ससुरालवालों के सामने रखी तो उन्होंने मुझे पूरा सपोर्ट किया। इसके बाद मैंने योगा की ट्रेनिंग पूरी की। अब मैं जहां भी जाती हूं लोग मुझे मिलते हैं तो मुझे पहचानते हैं और कहते हैं कि आप बहुत अच्छा योगा सिखा रही हैं। हम आपका चैनल देखकर योगा करना सीख गए हैं और अब पहले से ज्यादा फिट रहते हैं।

वुमन यूथ ऑइकन्स के एक्सपीरियेंस और डिस्कशन से निकले यह टिप्स…

अगर आपको अपनी लाइफ में हमेशा खुश रहना है तो गीता का यह प्रिंसिपल हमेशा फॉलो करें, कर्म करो फल की इच्छा मत करो।

अपने आपको कभी किसी से कम्पेयर ना करें।

वह काम करें जो आपको खुशी देता है।

युवा बड़ी कंपनी नहीं ऐसी कंपनी ज्वाइन करें जहां आपको सीखने, एक्सप्लोर करने और ग्रोथ के चांसेस अच्छे मिलें।

अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए कि हमें जीवन में क्या करना है, अपने दोस्तों की देखा देखी ना करें।

अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स पर ध्यान दें।

पढ़ाई के साथ-साथ शॉर्ट टर्म कोर्सेज भी करें जिससे आपको एक बेहतर कैरियर बनाने में काफी हेल्प मिलेगी।

दूसरों की बातों में न आते हुए अपनी पढ़ाई और कॅरियर पर फोकस करेें, आप जो करना चाहते हैं उसे दिल से करें।

भगवान ने आपको दो आंखें दी है, एक में अपने माता-पिता को रखें और दूसरी में अपने लक्ष्य को तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

यदि आपके पैरेंट्स आपके लिए कुछ रूल्स सेट कर रहे हैं, गाइडेंस दे रहे हैं तो उन्हें सम्मान दें।

पैसे के पीछे न भागे जो आपको पसंद है वह काम करें।

अपना प्रोफेशन, अपनी खुशी और रूचि के अनुसार सिलेक्ट करें।

अपने सपनों के पीछे भागे लेकिन शॉर्टकट्स के साथ नहीं।

लाइफ में सभी तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं पर उनसे घबराकर मेहनत करना न छोड़े।

फैमिली ड्यूटी निभाते हुए अपना कैरियर भी चुने। यकीन मानिए आपको अंदर से बहुत ही खुशी मिलेगी और फैमिली का पूरा प्यार और सपोर्ट भी।

images 3

क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस?

दुनिया भर में हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। महिला दिवस के नाम से ही जाहिर है कि ये दिन महिलाओं को समर्पित है। महिला दिवस के बहाने हम देश-दुनिया की ऐसी महिलाओं को याद करते हैं जिन्होंने वैश्विक पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इस खास दिन को मनाने का मकसद उन महिलाओं की उपलब्धियों, उनके जज्बे, उनकी ऐतिहासिक यात्राओं और उनके जीवन को याद करना हैं।

क्या है इस बार की थीम? हर साल महिला दिवस किसी ना किसी थीम पर आधारित होता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022 ) की थीम ‘जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो’ यानी मजबूत भविष्य के लिए लैंगिक समानता जरूरी है

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास एक सदी से भी पुराना है। पहली बार साल 1911 में महिला दिवस मनाया गया था। इस दिन को लेकर लोगों का नजरिया अलग-अलग है। कुछ लोग इस दिन को मनाने का कारण नारीवाद को मानते हैं। हालांकि, इसकी जड़ें श्रमिक आंदोलन से जुड़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा चयनित राजनीतिक और मानव अधिकार को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के राजनीतिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए ये दिन मनाया जाता है।

प्रसिद्ध जर्मन एक्टिविस्ट क्लारा ज़ेटकिन के प्रयास के चलते इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस ने साल 1910 में महिला दिवस के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और इस दिन पब्लिक हॉलिडे को सहमति दी थी।

इसके बाद 19 मार्च, 1911 को पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस डेनमार्क और जर्मनी में आयोजित मनाया गया। हालांकि महिला दिवस की तारीख को साल 1921 में बदलकर 8 मार्च कर दिया गया। तब से महिला दिवस पूरी दुनिया में 8 मार्च को ही मनाया जाता है।

सबसे पहले कहां मनाया गया महिला दिवस…

सबसे पहले साल 1909 में न्यूयॉर्क में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में महिला दिवस का आयोजन किया गया था। फिर 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। तब से धीरे-धीरे तमाम देशों में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। अब अमूमन सभी देशों में इसे मनाया जाता है। कुछ लोग बैंगनी रंग के रिबन पहनकर इस दिन का जश्न मनाते हैं।

महिला दिवस मनाने का क्या कारण है?

महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने के लिए दुनिया भर में इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन को इसलिए भी सेलिब्रेट किया जाता है ताकि महिलाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा सके और उनकी उपलब्धियों पर गर्व किया जा सके।

जरूर पढ़ें

मोस्ट पॉपुलर