अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली है इस मंत्र का उच्चारण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन संस्कृति में ॐ के उच्चारण को अत्यंत ही पवित्र और प्रभावशाली माना गया है। इस मंत्र के तीन अक्षरों में त्रिदेव (ब्रह्मा,विष्णु,महेश) की साक्षात उपस्थिति है। इसके उच्चारण में अ+उ+म् अक्षर आते हैं, जिसमें ‘अ’ वर्ण ‘सृष्टि’ का घोतक है ‘उ’ वर्ण ‘स्थिति’ दर्शाता है जबकि ‘म्’ ‘लय’ का सूचक है ।

ॐ के जाप से तीनों शक्तियों का एक साथ आवाहन हो जाता है। ॐ का जाप अनिष्टों का समूल नाश करने वाला व सुख-समृद्धि प्रदायक है । यह धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। ॐ कार ब्रह्मनाद है और इस शब्द के स्मरण,उच्चारण व ध्यान से आत्मा का ब्रह्म से संबंध बनता है। गायत्री मंत्र ,यज्ञ में आहुतियां देने वाले मंत्र ,सहस्त्र नाम सभी अर्चनाएं,आदि सभी ॐ से ही आरम्भ होते हैं।