अलग पहचान पाने के लिए आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग जरूरी

ज्यादातर लोग अपने आसपास होने वाली घटनाओं या समस्याओं को बचपन से सुन रहे पुराने नजरिए या तरीके से ही सोचते हैं। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारा अलग नजरिया परिस्थिति को आसान बना सकता है।

मगर आउट ऑफ द बॉक्स सोच रखने वाले लोग अक्सर कुछ ऐसे कमाल कर देते हैं, जिसके बारे में कई लोग सोच भी नहीं पाते हैं। यहां दी जारी रही यह प्रेरक कहानी में ‘आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग’ को बहुत ही सरलता से समझाया गया है-

जापान की एक साबुन बनाने वाली कंपनी अपनी क्वॉलिटी और वर्ल्ड क्लास प्रॉसेसेज के लिए जानी जाती थी। एक बार उनके सामने एक अजीब समस्या आई। उन्हें कम्प्लेंट मिली कि एक कस्टमर ने जब साबुन का डिब्बा खरीदा तो वो खाली था। कम्प्लेंट की जांच की गई तो पता चला कि चूक कंपनी की तरफ से ही हुई थी। असेंबली लाइन से जब साबुन डिलीवरी डिपार्टमेंट को भेजे जा रहे थे तब एक डिब्बा खाली ही चला गया। इस घटना से कंपनी की काफी किरकिरी हुई।

कंपनी के अधिकारी बड़े परेशान हुए कि आखिर ऐसा कैसे हो गया। तुरंत एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई। गहन चर्चा हुई और भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए लोगों से उपाए मांगे गए। बहुत विचार-विमर्श के बाद निश्चय किया गया कि असेंबली लाइन के अंत में एक एक्स-रे मशीन लगाई जाएगी जो एक हाई रेजॉल्यूशन मॉनिटर से कनेक्टेड होगी। मॉनिटर के सामने बैठा व्यक्ति देख पाएगा की डिब्बा खाली है या भरा। कुछ ही दिनों में ये सिस्टम इम्प्लीमेंट होने वाला था। इसी दौरान जब एक छोटी रैंक के कर्मचारी को इस समस्या का पता चला तो उसने इस समस्या का हल एक बड़े ही सस्ते और आसान तरीके से निकाल दिया।

उसने एक तेज चलने वाले पंखे को असेंबली लाइन के सामने लगाने का सुझाव दिया। अब हर एक डिब्बे को पंखे की तेज हवा के सामने से होकर गुजरना पड़ता। जैसे ही खाली डिब्बा सामने आता, हवा उसे उड़ाकर दूर फेंक देती। इस शख्स की क्रिएटिव थिंकिंग से न सिर्फ कंपनी की करोड़ों की रकम बची, बल्कि उसे काम में तरक्की भी मिली।

कहानी की सीख-
क्रिएटिव थिंकिंग की सबसे अच्छी बात ये है कि इसका किताबी ज्ञान से कोई लेना-देना नहीं होता। हममें से हर एक व्यक्ति अपनी समस्याओं को सरल तरीकों से सुलझा सकता है, पर अक्सर होता यही है कि हम सबसे पहले दिमाग में आने वाले हल को ही सबसे अच्छा मानकर बैठ जाते हैं। यह कहानी आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग का एक बढ़िया उदाहरण है।