Wednesday, May 18, 2022
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आज के समय में मासूमों को ऐसे बनाएं शक्तिमान

आज के समय में अधिकतर पेरेंट्स वर्किंग हैं। इस वजह से कई बार बच्चे को घर पर अकेले ही रहना पड़ता है। ऐसे में कभी भी कोई भी घटना या हादसा हो सकता है। घर में हर तरह की घटनाओं और इमरजेंसी के लिए बच्चे को तैयार करें। इमरजेंसी के लिए तैयार करना भी बच्चे की परवरिश का एक हिस्सा है। उन्हें बताएं कि कोई भी परेशानी आ जाने पर वह इसे किस तरह से हैंडल करें। अगर आपकी बिल्डिंग या घर में कोई शॉर्ट सर्किट हो जाए तो ऐसे में उनको क्या करना है। अगर अचानक कोई बेहोश हो जाए तो कैसे उस व्यक्ति को फस्र्ट एड देना है। ये सब बातें बताकर अपने बच्चों को इमरजेंसी के लिए तैयार करें।

छोटे बच्चें को महत्वपूर्ण मोबाइल नंबर याद कराएं

अपने घर के छोटे बच्चों को परिवार के लोगों के नंबर याद करवाएं। इसके साथ ही बच्चों को कुछ इमरजेंसी नंबर भी याद करवाएं। बच्चे को कुछ जरूरी इमरजेंसी नंबर देकर जाएं ताकि कोई अनहोनी होने पर वह मदद बुला सके। अगर घर में बच्चा अकेला या ग्रैंड पेरेंट्स के साथ अकेला रह रहा हो तो उन्हें मोबाइल जरूर दें ताकि वह आपको समय-समय पर सूचित करता रहे और आप भी वक्त-वक्त पर उसकी खोज-खबर लेते रहें।

दरवाजा खोलना व बंद करना सिखाएं

बच्चे को अपने सामने दरवाजा बंद करना और खोलना सिखाएं। उसे यह भी बताएं गेट के उपर का लॉक लगाने की जगह वह नीचे का लॉक लगाए। इसके साथ बच्चे के खाने-पीने की चीजें टेबल पर ही रखकर जाएं ताकि भूख लगने पर वो किचन में न जाए।

चोरी होने पर 100 नंबर पर करें कॉल

अगर कभी घर में चोर आ जाए या चोरी हो जाए तो ऐसी स्थिति के लिए बच्चे को कुछ जरूरी चीजें समझाएं। बच्चे को यह बताएं कि घर में चोर घुस आ जाए तो वह शोर न मचाए। वह दूसरे कमरे में है तो 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दे और गेट अंदर से लॉक कर कहीं सुरक्षित स्थान पर छुप जाए।

बीमार होने पर डायल करें 108

घर में अगर बड़े बुजुर्ग और छोटा बच्चा हो और आप घर पर नहीं हैं, इस बीच किसी की तबीयत खराब हो जाए तो बच्चे को तैयार करें। बच्चे को बताएं कि सबसे पहले 108 नंबर पर कॉल करके एम्बुलेंस को बुला लें।

आग लगने पर डायल करें 101

बच्चे को यह बताएं कि कभी भी आगजनी की घटना हो तो सबसे पहले 101 नंबर पर कॉल कर इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड को दें। आग लगने पर घर से बाहर निकल जाएं। ऐसी स्थिति में बच्चों को सीढ़यिों का इस्तेमाल करना बताएं और लिफ्ट का प्रयोग करने से मना कर दें। बच्चे को यह भी बताएं कि जब हर तरफ धुआं हो तो धुएं से बचने के लिए किसी कपड़े को गीला कर उससे अपने मुंह और नाक को ढक लेना चाहिए। अगर कभी कपड़ें में आग लग जाए तो घबरा कर न भागें।

बच्चें को बताए घर में शॉर्ट-सर्किट होने पर क्या करें

अपने बच्चे को यह बताएं कि वह घर में अकेला है और उस वक्त शॉर्ट-सर्किट हो जाए तो घबराएं नहीं। सबसे पहले सारी स्विच बंद कर दें। अपने घर में हमेशा ऑटोमेटिक लाइट रखें। ताकि लाइट जाने पर बच्चा घबराए नहीं। ऐसा होने पर वह सोसाइटी में किसी को जानकारी दे, इसके साथ ही घर में किसी को कॉल कर इसकी सूचना घर वालों को दे।

पैनिक होने का मतलब भी बच्चें को समझाएं

जिस तरह से बड़े किसी हालात से घबरा सकते हैं, ठीक उसी तरह से बच्चे भी पैनिक हो सकते हैं। बच्चों को समझाएं कि जब कोई प्रॉब्लम आए तो घबराना नहीं चाहिए। बच्चे को बताएं कि जब भी पब्लिक प्लेस में जाए, उस दौरान अपने आसपास की चीजों को न छूएं। किसी भी तरह की समस्या दिखने पर तुरंत अपने बड़ों को बताएं।

कार लॉक होने पर क्या करें

कार में हमेशा 3-4 पानी की बोटल रखें, बच्चे को यह बताएं कि अगर गाड़ी लॉक हो जाती है तो सबसे पहले गाड़ी के शीशे और बॉडी पर पानी डालें या गीले कपड़े से कार का स्टील स्पेस ढंक दें। ऐसा करने पर कार के अंदर का टेंपरेचर 10 डिग्री तक कम किया जा सकता है। कार में एक हथौड़ा भी रखें।

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